रायगढ़ , जुलाई 12 -- महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में सुधागढ़ तालुका के वाव्हे गांव के पास अंबा नदी में एक दुर्लभ और अनोखी 'एलीगेटर गार' मछली मरी हुई मिली है। मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका में पाई जाने वाली यह विदेशी मछली अपने चमकीले पीले-नारंगी रंग के कारण स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच कौतूहल का विषय बन गयी है।
इस मछली को स्थानीय निवासी कैलाश हिलम और केतन म्हास्के ने तब देखा जब वे नदी के किनारे घूम रहे थे। आमतौर पर एलीगेटर गार मछली गहरे भूरे या सलेटी रंग की होती है लेकिन इसके अनोखे रंग ने तुरंत सबका ध्यान खींच लिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसका यह अलग रंग 'एल्बिनेज्म' (रंगहीनता) नाम की एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति के कारण है, जिसमें शरीर में प्राकृतिक रंग बनाने वाले तत्वों की कमी हो जाती है।
एलीगेटर गार मीठे पानी में रहने वाली एक बड़ी शिकारी मछली है, जो उत्तरी अमेरिका की नदियों और झीलों में मिलती है। इसका मुंह और नुकीले दांत मगरमच्छ (एलीगेटर) जैसे दिखते हैं, इसलिए इसका यह नाम पड़ा है। यह प्रजाति भारत में नहीं पाई जाती है।
यही वजह है कि अंबा नदी में इसके मिलने से यह सवाल उठ रहे हैं कि यह विदेशी मछली यहां कैसे पहुँची। विशेषज्ञों को शक है कि किसी ने इसे अपने एक्वेरियम या घर में पाला होगा और जब यह बहुत बड़ी हो गई होगी तो इसे नदी में छोड़ दिया गया।
पिछले कुछ सालों में पर्यावरणविदों ने एक्वेरियम की विदेशी मछलियों को नदियों या झीलों में छोड़ने की आदत पर गहरी चिंता जतायी है। ये बाहरी प्रजातियाँ कई बार प्राकृतिक वातावरण में ढलकर अपनी संख्या बढ़ा लेती हैं, जिससे स्थानीय मछलियों और पानी के पूरे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचता है।
इस मछली के मिलने की खबर से इलाके में काफी चर्चा है और इस रंग-बिरंगे जीव को देखने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ जुट रही है।
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