मुंबई , सितंबर 13 -- शिया इस्माइली मुस्लिमों के 50वें वंशानुगत इमाम और आगा खां डेवलपमेंट नेटवर्क (एकेडीएन) के अध्यक्ष प्रिंस रहीम आगा खां पंचम ने रविवार को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की।
इस दौरान दोनों नेताओं ने आपसी हित के मुद्दों और भावी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
प्रिंस रहीम आगा खां 12 से 14 सितंबर तक मुंबई दौरे पर हैं। फरवरी 2025 में इमामत संभालने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। वह उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के निमंत्रण पर 9 से 15 सितंबर तक भारत के दौरे पर आये हैं।
प्रिंस रहीम आगा खां अपने पिता प्रिंस करीम आगा खां चतुर्थ के निधन के बाद फरवरी 2025 में शिया इस्माइली मुस्लिमों के वंशानुगत इमाम बने थे।
यहां आने से पहले उन्होंने 10 सितंबर को नयी दिल्ली में कई उच्च स्तरीय बैठकें कीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन से भी भेंट की, जिन्होंने उनके सम्मान में दोपहर के भोज का आयोजन किया था। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की।
नयी दिल्ली में बैठकों के दौरान प्रिंस रहीम आगा खां ने एकेडीएन की पहलों को भारतीय सरकार से मिल रहे सहयोग के प्रति आभार जताया और भारत की विकास प्राथमिकताओं व 'विकसित भारत 2047' के विजन में नेटवर्क के योगदान के बारे में जानकारी दी।
मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ हुई बैठक में महाराष्ट्र में इस्माइली इमामत और एकेडीएन के दीर्घकालिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस मुलाकात से राज्य सरकार और नेटवर्क के बीच सहयोग को और मजबूत करने के रास्ते तलाशने का अवसर मिला।
प्रिंस रहीम आगा खां ने कहा, "महाराष्ट्र वर्षों से भारत में इस्माइली इमामत और आगा खां डेवलपमेंट नेटवर्क की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। मैं माननीय मुख्यमंत्री से मुलाकात के अवसर और निरंतर मिल रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता हूं।"अपनी भारत यात्रा के दौरान आगा खां का गुजरात और तेलंगाना जाने का भी कार्यक्रम है, जहां वे संबंधित राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों से मुलाकात कर एकेडीएन कार्यक्रमों और भविष्य की साझेदारी पर चर्चा करेंगे। वे दोनों राज्यों में इस्माइली समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत करेंगे।
एकेडीएन संस्थाएं 19वीं शताब्दी से भारत में सक्रिय हैं और वर्तमान में ग्रामीण व शहरी विकास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आर्थिक समावेशन, संस्कृति, आवास, प्रारंभिक बचपन के विकास और जलवायु लचीलेपन से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से 90 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बना चुकी हैं।
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