नागपुर , अगस्त 04 -- महाराष्ट्र में मंगलवार को एलोपैथिक डॉक्टरों ने राज्य सरकार के उस फ़ैसले के विरोध में 24 घंटे की राज्यव्यापी हड़ताल की जिसके तहत 'मॉडर्न फार्माकोलॉजी में सर्टिफ़िकेट कोर्स' (सीसीएमपी) पूरा करने वाले बीएचएमएस डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) के साथ पंजीकरण की अनुमति दी गयी है।

विरोध प्रदर्शन का आह्वान भारतीय चिकित्सा संघ, महाराष्ट्र ने किया और इसे महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ़ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) और डॉक्टरों के अन्य संगठनों सहित कई चिकित्सा संस्थाओं ने समर्थन दिया था।

आंदोलन के दौरान पूरे राज्य के सरकारी एवं निजी अस्पतालों में नियमित ओपीडी, ऐच्छिक सर्जरी और गैर-आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं बंद रहीं , हालांकि आपातकालीन, ट्रॉमा और क्रिटिकल केयर सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहीं ताकि जिन मरीज़ों को तुरंत इलाज की ज़रूरत थी उन पर कोई असर न पड़े।

यह आंदोलन महाराष्ट्र सरकार के तीन अगस्त को जारी उस सरकारी आदेश के बाद शुरू हुआ है जिसमें एक साल का सीसीएमपी कोर्स पूरा करने वाले बीएचएमएस डॉक्टरों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था। इस कदम से योग्य होम्योपैथी चिकित्सक महाराष्ट्र चिकित्सा संघ में पंजीयन करा सकेंगे और निर्धारित कानूनी दायरे में रहकर आधुनिक चिकित्सा की प्रैक्टिस कर सकेंगे। आईएमए ने इस फ़ैसले का कड़ा विरोध किया है और आरोप लगाया है कि इससे क्रॉस-पैथी को बढ़ावा मिलेगा और मरीज़ों की सुरक्षा से समझौता होगा।

संघ का कहना है कि एक साल का ब्रिज कोर्स, एमबीबीएस डॉक्टरों की व्यापक शिक्षा एवं क्लिनिकल प्रशिक्षण की बराबरी नहीं कर सकता है। उन्होंने मांग की है कि जब तक बंबई उच्च न्यायालय इस मामले पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक सरकार तुरंत इस अधिसूचना को वापस ले।

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