मुंबई , अगस्त 23 -- महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य के शिक्षा क्षेत्र की विस्तृत समीक्षा करने के लिए मुंबई स्थित नंदनवन बंगले पर विद्यालय शिक्षा मंत्री दादा भुसे और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चार घंटे की बैठक की।

वरिष्ठ अधिकारियों ने श्री शिंदे को विभाग की ओर से शुरू की गयी विभिन्न पहलों, योजनाओं और प्रगति के बारे में जानकारी दी।

शिक्षा मंत्रालय के किये जा रहे अच्छे कार्यों की सराहना करते हुए श्री शिंदे ने विभाग को अब अभियान की तरह काम करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि ये पहल पूरे महाराष्ट्र के हर विद्यालय और हर छात्र तक पहुंचे। उन्होंने शिक्षा विभाग को विद्यालयों का आधुनिकीकरण करने और राज्य की शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक, दृश्यमान और गुणात्मक सुधार लाने के लिए एक स्पष्ट, व्यापक और समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

श्री शिंदे ने कहा कि हमें एक आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली बनानी चाहिए, जो महाराष्ट्र के हर बच्चे को कल के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करे।

कार्य योजना का ध्यान शिक्षा विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षकों को साथ जोड़ने, शिक्षक प्रशिक्षण, प्रेरणा और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा उत्कृष्टता और नवाचार का प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने और उन्हें मान्यता देने पर केंद्रित होगा।

श्री शिंदे ने विभाग को महाराष्ट्र में केंद्र सरकार की विभिन्न शिक्षा योजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया, ताकि उनका लाभ राज्य भर के विद्यालयों और छात्रों तक पहुंचे।

श्री शिंदे ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा को पाठ्यक्रम और परीक्षाओं से आगे बढ़ना चाहिए, जिसमें छात्रों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक कल्याण को शिक्षा प्रणाली के केंद्र में रखा जाये। उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण, मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण पर केंद्रित पहलों पर अधिक ध्यान देने का निर्देश दिया।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि शिक्षा विभाग के किये गये अच्छे कार्यों और सफल पहलों को लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि माता-पिता और नागरिक महाराष्ट्र के विद्यालयों में हो रहे सकारात्मक बदलावों से अवगत रहें।

विधायकों और सांसदों को अपने चुनाव क्षेत्रों के विद्यालयों को गोद लेने और उपलब्ध धन तथा स्थानीय संसाधनों के माध्यम से उनके विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा।

श्री शिंदे ने कहा कि जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदायों की अधिक भागीदारी से विद्यालयों के विकास में काफी तेजी आ सकती है।

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