मुंबई , जून 13 -- शिवसेना की ओर से शिवसेना (उद्धव) में दलबदल कराने की अफवाहें इन दिनों तेज हैं और इसे 'ऑपरेशन टाइगर' कहा जा रहा है।इन चर्चाओं के कारण महाराष्ट्र का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।
सूत्रों का दावा है कि शिवसेना (उद्धव) के नौ में से सात सांसद शिवसेना के संपर्क में हैं और इस रणनीति में कथित तौर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित जगह सहित प्रमुख पदों के प्रस्ताव शामिल हैं।
संभावित विभाजन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शिवसेना (उद्धव) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 14 जून को अपने निवास 'मातोश्री' पर पार्टी के सभी सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलायी है, जिसे पार्टी के भीतर वफादारी का आकलन करने और बढ़ती खरीद-फरोख्त के डर का मुकाबला करने के निर्णायक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों से संकेत मिलता है कि शिवसेना (उद्धव) को कमजोर करने के इस अभियान को कथित तौर पर सात जून को नयी दिल्ली में हुई गोपनीय बैठक के बाद शीर्ष स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। हाई-प्रोफाइल दौरों के सिलसिले ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
शिवसेना (उद्धव) के सांसदों, विशेष रूप से श्री नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), श्री राजाभाऊ वाजे (नासिक) और श्री भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) तथा शिवसेना के प्रमुख नेताओं के बीच हाल ही में हुई बातचीत ने बड़ी चिंताएं पैदा कर दी हैं।
नेताओं ने इन मुलाकातों को निर्वाचन क्षेत्र के विकास और धन आवंटन के संबंध में चर्चा बताया है, लेकिन विश्लेषकों का सुझाव है कि पर्दे के पीछे एक बड़ा राजनीतिक पुनर्गठन चल रहा है।
बढ़ती अनिश्चितता के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सक्रिय हो गये हैं। चौदह जून की बैठक से पार्टी की एकजुटता की अग्निपरीक्षा होने की उम्मीद है।नेतृत्व के लिए चिंता का एक मुख्य बिंदु परभणी सीट के सांसद संजय 'बंधु' जाधव की स्थिति है, जिनकी हाल ही में पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों से अनुपस्थिति और शिंदे खेमे से उनकी नजदीकी की रिपोर्ट सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गयी हैं।
राज्य के बदलते सत्ता समीकरणों के बीच अब सभी की निगाहें 'मातोश्री' पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर करीबी नजर रख रहे हैं कि आगामी बैठक कथित खरीद-फरोख्त के प्रयासों के खिलाफ एक एकजुट मोर्चा पेश करेगी या ठाकरे गुट को अपने अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ेगा।
इन चर्चाओं के परिणाम से शिवसेना (उद्धव) खेमे की आंतरिक स्थिरता स्पष्ट होने और आसन्न विभाजन की लगातार चल रही अफवाहों का एक निश्चित उत्तर मिलने की उम्मीद है।
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