मुंबई/हैदराबाद , मई 20 -- ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों से मिल रही अनुचित प्रतिस्पर्धा के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) की एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का महाराष्ट्र और तेलंगाना में समेत देश भर में व्यापक असर देखा गया।

राज्य के कोल्हापुर व पुणे और तेलंगाना के कई हिस्सों में हजारों मेडिकल और ड्रग्स की दुकानें बंद रहीं। आपातकालीन स्थिति से निपटने और जनता की सुविधा के लिए दोनों राज्यों में सरकारी व निजी अस्पतालों से संबद्ध फार्मेसियों और कुछ चुनिंदा आउटलेट्स को खुला रखा गया था।

कोल्हापुर जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मदन पाटिल ने यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि जिले के 4,000 दवा विक्रेताओं ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखकर इस 'बंद' को भारी समर्थन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा व्यवसाय 'औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियम 1945' के तहत संचालित होता है। इस कानून में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के बावजूद देश भर में अवैध रूप से ऑनलाइन दवाएं बेची जा रही हैं।

श्री पाटिल ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने 28 अगस्त 2018 को जीएसआर 517(ई) के तहत एक अधिसूचना जारी की थी, लेकिन इसे अभी तक कानून में नहीं बदला गया है। इस बीच दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका लंबित है और अदालत ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक भी लगा रखी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के दौरान 26 मार्च 2020 को जीएसआर 220(ई) के तहत दवाओं की होम डिलीवरी के लिए अस्थायी छूट दी गयी थी। महामारी समाप्त होने के पांच साल बाद भी इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया गया है। ऑनलाइन कंपनियां इसका नाजायज फायदा उठा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की दवा वितरण प्रणाली को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

पुणे से मिली रिपोर्ट के अनुसार, एआईओसीडी के पदाधिकारियों ने दावा किया कि इस देशव्यापी हड़ताल को पुणे में भी भारी प्रतिक्रिया मिली। पुणे एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप पारख के नेतृत्व में पावर हाउस, रास्ता पेठ से जिला कलेक्टर कार्यालय तक एक विरोध मार्च निकाला गया।

इस मार्च में पुणे के सचिव अनिल बेलकर और कोषाध्यक्ष रोहित करपे सहित सैकड़ों पदाधिकारी शामिल हुए। संगठन ने हड़ताल को शत-प्रतिशत सफल बताते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो इससे भी अधिक उग्र आंदोलन शुरू किया जायेगा।

तेलंगाना में बंद के आह्वान पर मेडिकल दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, हालांकि चुनिंदा क्षेत्रों में कुछ आउटलेट्स ने अपना कामकाज जारी रखा। 'तेलंगाना चैंबर ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट' के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाना, कॉर्पोरेट संस्थाओं के दिये जा रहे अत्यधिक डिस्काउंट को नियंत्रित करना और नकली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाना है।

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