मुंबई , अक्टूबर 28 -- महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में दरारें खुलकर सामने आ गयी हैं जिससे राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में उथल-पुथल मच गयी है।

राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने बुधवार को सार्वजनिक वक्तव्य में पार्टी नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया और तत्काल एवं गहन आत्ममंथन की मांग की। चुनाव में मिली हार, जिसमें छत्रपति संभाजीनगर (मराठवाड़ा) जैसे मजबूत गढ़ों में करारी शिकस्त भी शामिल है, के बाद सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए श्री पटेल ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा, "आज के विधान परिषद चुनाव के नतीजे एक गंभीर और अहम चेतावनी हैं। जनता का भरोसा फिर से जीतने, अपनी प्राथमिकताओं को नये सिरे से तय करने और संगठन में आमूल-चूल बदलाव लाने के लिए, हमें तुरंत बहुत ही कठोर आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है।"श्री पटेल का यह आक्रोश लंबे समय से चल रहे आंतरिक मतभेदों का नतीजा है जो मतदान से काफी पहले ही शुरू हो गया था। जानकारी के अनुसार, सीटों के बंटवारे को लेकर हुई बातचीत के दौरान तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया गया। इसका सबसे बड़ा परिणाम यह हुआ कि राकांपा का पारंपरिक और ऐतिहासिक गढ़ पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र गठबंधन सहयोगियों को दे दिया गया। इसके नतीजों ने पार्टी के भीतर पीढ़ियों के बीच बढ़ती खाई को उजागर कर दिया है।

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