मुंबई , मार्च 23 -- महाराष्ट्र में कथित 'धर्मगुरु' मामले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में श्री राउत पर "चुनिंदा तर्क" अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि केवल किसी विवादित व्यक्ति के साथ फोटो होने के आधार पर महायुति सरकार के नौ मंत्रियों को सह-आरोपी बनाने की मांग की जा रही है, तो "क्या यही मापदंड उद्धव ठाकरे पर भी लागू होगा?"श्री बन ने आरोप लगाया कि कथित धर्मगुरु की गतिविधियां 2003 से जारी हैं, लेकिन कांग्रेस और महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकारों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दावा किया कि श्री ठाकरे के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भी इस आश्रम को अप्रत्यक्ष समर्थन मिला।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस मामले में सख्त कार्रवाई का श्रेय देते हुए कहा कि श्री राउत कुछ दिन पहले तक उनकी तारीफ कर रहे थे, लेकिन अब उन्हीं पर आरोप लगा रहे हैं, जो विरोधाभासी है।
भाजपा नेता ने श्री राउत पर "छोटी राजनीति" करने और निराधार आरोप लगाने का आरोप लगाया तथा कहा कि वर्तमान सरकार के तहत जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्री बन ने यह भी दावा किया कि विपक्ष, विशेषकर शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में असंतोष बढ़ रहा है, जिसका कारण धन की कमी नहीं बल्कि नेतृत्व शैली है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे और उनके पुत्र आदित्य ठाकरे पार्टी प्रतिनिधियों से कम मिलते हैं और क्षेत्रों का दौरा भी कम करते हैं।
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