कोल्हापुर , अगस्त 8 -- पोलैंड का एक उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिले के वलिवड़े गांव स्थित उस ऐतिहासिक स्मारक को श्रद्धांजलि देने के लिए शनिवार को यहां पहुंचा, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों के लिए आश्रय स्थल रहा था।
इसके अलावा यह प्रतिनिधिमंडल प्रस्तावित 'मानवता और शांति संग्रहालय' परियोजना का निरीक्षण भी करेगा।
पोलैंड की संसद (सेज्म) की वरिष्ठ सदस्य और 'पोलैंड-भारत संसदीय समूह' की अध्यक्ष सुश्री किंगा गाजेवस्का के नेतृत्व वाले आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में भारत में पोलैंड के राजदूत पिओत्र एंटोनी स्वितातलास्की और मुंबई में पोलिश महावाणिज्य दूत टोमाश विलगोमास भी शामिल हैं।
कोल्हापुर के नये महल में पूर्व सांसद छत्रपति संभाजीराजे, महारानी संयोगिताराजे और युवराज शहाजीराजे ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी और सोवियत संघ के पोलैंड पर हमला करने के बाद लाखों पोलिश नागरिक विस्थापित हो गये थे। इस अवधि के दौरान, कोल्हापुर के छत्रपति परिवार ने 1942 से 1948 तक कोल्हापुर के पास वलिवड़े में लगभग 5,000 पोलिश शरणार्थियों को शरण दी थी।
छत्रपति परिवार के संरक्षण और कोल्हापुर के लोगों के आत्मीय सहयोग से इन शरणार्थियों ने सम्मानजनक नया जीवन तैयार किया। इसी ऐतिहासिक स्मारक का दौरा करने और कोल्हापुर से जुड़ी यादों को फिर से तरोताजा करने के लिए पोलिश प्रतिनिधिमंडल आज यहां पहुंचा है।
यूरोप लौटने के बाद भी कई पोलिश नागरिकों ने कोल्हापुर को अपना दूसरा घर माना। इस ऐतिहासिक विरासत को यादगार बनाये रखने के लिए 1998 में इस शरणार्थी बस्ती की स्वर्ण जयंती के अवसर पर छत्रपति संभाजीराजे की पहल पर और 2019 में इसकी 71वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था। वर्ष 2019 में महाराष्ट्र सरकार और पोलैंड सरकार ने संयुक्त रूप से वलिवड़े में 'मानवता और शांति संग्रहालय' की स्थापना करने की घोषणा की थी। कोविड महामारी और कोल्हापुर में आयी बाढ़ के कारण परियोजना के क्रियान्वयन में विलंब हुआ, लेकिन युवराज छत्रपति संभाजीराजे और युवराज्ञी संयोगिताराजे के निरंतर प्रयासों से यह पहल आगे बढ़ती रही।
भारत की पूर्व राजदूत नगमा मलिक, वर्तमान राजदूत नीता भूषण, भारत में पोलैंड के पूर्व राजदूत एडम बुराकोव्स्की, वर्तमान राजदूत पिओत्र एंटोनी स्वितातलास्की के साथ-साथ माल्गोरजाता वेजिशिस-गोलेम्बियाक (पोलिश इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली) और टोमाश विलगोमास (मुंबई में पोलिश महावाणिज्य दूत) के सहयोग ने इस पहल को और सुदृढ़ किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोलैंड यात्रा के दौरान राजधानी वारसॉ स्थित कोल्हापुर स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी और छत्रपति परिवार एवं कोल्हापुर की जनता के मानवीय कार्यों का गौरवगान किया था।
इन ऐतिहासिक घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में पोलैंड का एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल आज कोल्हापुर के दौरे पर है। इस दौरे को इस वर्ष के अंत में पोलैंड के प्रधानमंत्री की संभावित कोल्हापुर यात्रा की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने संग्रहालय भवन के लिए पहले ही लगभग 1.5 करोड़ रुपये खर्च कर किये हैं और इसे विश्व स्तरीय संग्रहालय के रूप में विकसित करने के लिए 5.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। भविष्य में इस परियोजना को यूनेस्को की मान्यता दिलाने के प्रस्ताव पर भी प्रयास जारी हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित