कोल्हापुर , जुलाई 24 -- महाराष्ट्र के जल संसाधन विभाग ने कोल्हापुर और सांगली जिलों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग के लिए कृष्णा नदी से उपलब्ध पानी को नीरा नदी में मोड़ने की परियोजना के सर्वेक्षण, जांच, संकल्पना, बजट और परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए 24.5 करोड़ रुपये के खर्च को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है।

आज यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कृष्णा बेसिन जल विवाद पंचाट-2 का फैसला हालांकि घोषित हो चुका है, लेकिन इसे अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है। इसलिए वर्तमान में पंचाट-1 के अनुसार ही कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही चल रही है। इसी पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र कृष्णा घाटी विकास निगम के शासी बोर्ड ने पंचाट-1 के अनुसार महाराष्ट्र को आवंटित उस पानी के उपयोग की योजना को मंजूरी दी थी, जो वास्तव में बिना इस्तेमाल हुए बेकार बह जाता था।

मुख्य अभियंता और परियोजना निदेशक ने एशियाई विकास बैंक की सहायता से लागू किये जा रहे महाराष्ट्र स्मार्ट विकास कार्यक्रम के तहत तकनीकी सलाहकार बोर्ड के प्रस्तुत पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है। इस योजना के अनुसार, परियोजना को दो चरणों में लागू किया जायेगा।

पहले चरण में कृष्णा नदी पर बने सप्तेवाड़ी बांध से नीरा नदी पर बने उद्धांत बांध तक काम किया जायेगा और दूसरे चरण में, नीरा नदी के उद्धांत बांध से उजानी बांध तक काम होगा। सर्वेक्षण, डिजाइन और बजट के लिए 19,40,05,747 रुपये, आकस्मिक व्यय के रूप में 58,20,172 रुपये और स्थापना तथा मशीनरी व्यय के रूप में 38,80,115 रुपये के खर्च को मंजूरी दी गयी है।

आदेश में कहा गया है कि सरकार के फैसले के अनुसार कुछ शर्तें लगायी गयी हैं। सरकार की मंजूरी के बिना परियोजना में ऐसे नये तत्व शामिल नहीं किये जायेंगे, जो वित्तीय देनदारी पैदा करते हों, सक्षम स्तर पर सभी तकनीकी स्वीकृतियां लेना अनिवार्य होगा और यह सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी महाराष्ट्र कृष्णा घाटी विकास निगम की होगी कि कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-1 के प्रावधानों का उल्लंघन न हो।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित