मुंबई , फरवरी 17 -- राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पार्टी विधायकों को दोनों एनसीपी गुटों के संभावित विलय पर सार्वजनिक रूप से बयान देने से परहेज करने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सोमवार देर शाम आयोजित बैठक में वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। वे 26 फरवरी को होने वाली पार्टी कार्यकारिणी बैठक में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगी।
बैठक के दौरान विलय का मुद्दा उठने पर माहौल तनावपूर्ण बताया गया। पार्टी नेताओं और विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि वे इस विषय पर सार्वजनिक मंचों पर कोई टिप्पणी न करें और अपने विचार केवल श्रीमती सुनेत्रा पवार, श्री प्रफुल्ल पटेल या श्री सुनील तटकरे के समक्ष रखें।
बताया जाता है कि विधायक हीरामन खोसकर ने पहले सार्वजनिक रूप से दोनों एनसीपी के "100 प्रतिशत विलय" की वकालत की थी। बैठक में उनके इस रुख पर आपत्ति जताई गई और उन्हें चुप रहने की नसीहत दी गई।
इसी तरह खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि ज़िरवाल, जो विलय के समर्थक माने जाते हैं, हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई के बाद दबाव में हैं। एसीबी ने मंत्रालय (मंत्रालय भवन) स्थित उनके विभागीय कार्यालय पर छापा मारकर दो अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। सूत्रों के मुताबिक, श्रीमती सुनेत्रा पवार ने उनसे मुलाकात में पार्टी की छवि का ध्यान रखने को कहा है।
एक अन्य विधायक अमोल मिटकरी भी विलय के पक्ष में मुखर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें भी सार्वजनिक बयानबाजी से बचने का निर्देश दिया गया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए श्रीमती सुनेत्रा पवार ने कहा कि पार्टी महाराष्ट्र के कल्याण और विकास के लिए कार्य करती रहेगी, जिसे उन्होंने अपने दिवंगत पति अजित पवार का सपना बताया।
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