मुंबई , जुलाई 2 -- महाराष्ट्र सरकार ने गुरूवार को विवादित 'महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026' के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
यह निर्णय वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की उस सख्त चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने सरकार द्वारा नए अधिसूचित संशोधनों को वापस न लेने पर पांच जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की धमकी दी थी।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को 12 जून को अधिसूचित संशोधित प्रावधानों को स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश राज्य प्रशासन और श्री हजारे के बीच उच्च स्तरीय विचार-विमर्श के बाद आया। श्री हजारे ने इन नए नियमों को "नागरिक विरोधी" बताया था और सरकार पर पारदर्शिता के ऐतिहासिक 2005 के कानून की भावना को कमजोर करने का आरोप लगाया था।
इन विवादित 2026 के नियमों में शुल्क में भारी वृद्धि की गई थी, जिसके तहत सूचना का अधिकार आवेदन शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये और जानकारी की प्रतियों का शुल्क 2 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये प्रति पृष्ठ कर दिया गया था। इसके अलावा, अधिसूचना में प्रथम और द्वितीय अपीलों के लिए क्रमशः 50 रुपये और 100 रुपये का शुल्क लागू किया गया था।
व्यापक आलोचना का कारण बने अन्य प्रावधानों में प्रति आवेदन 150 शब्दों की सख्त सीमा, प्रत्येक अनुरोध के लिए अनिवार्य फोटो पहचान प्रमाण की आवश्यकता और व्यक्तिगत जानकारी मांगते समय आवेदकों को "व्यापक जनहित" साबित करने के लिए बाध्य करने वाला नियम शामिल था। इन नियमों ने लोक सूचना अधिकारियों को "बार-बार किए जाने वाले" आवेदनों को खारिज करने या अपीलकर्ता के सुनवाई में अनुपस्थित रहने पर अपीलों को निरस्त करने का अधिकार भी दे दिया था।
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