मुंबई , फरवरी 23 -- महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन जहां एक ओर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राज्य की आर्थिक प्रगति का खाका पेश किया, वहीं दूसरी ओर सदन ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को भावपूर्ण विदाई दी।
संसदीय परंपरा के अनुसार, राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को दिवंगत नेता के सम्मान में शोक प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान मुख्यमंत्री अत्यंत भावुक नजर आये और उन्होंने श्री पवार के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों को याद करते हुए उनके निधन को राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में जहां 30 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश और 'विकसित महाराष्ट्र' के संकल्प पर जोर दिया, वहीं सदन की कार्यवाही का शुरुआती हिस्सा पूरी तरह से श्री अजित पवार की स्मृतियों और उनके प्रशासनिक योगदान के नाम रहा।
सत्र के पहले दिन राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने विधानमंडल के दोनों सदनों को संबोधित किया और राज्य की आर्थिक प्रगति का विवरण पेश किया। राज्यपाल ने 'विकसित महाराष्ट्र' के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और विकास की गति बढ़ाने के उद्देश्य से प्रमुख पहलों की रूपरेखा पेश की।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें दावोस में हुए 'विश्व आर्थिक मंच' का विशेष उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि दावोस में हस्ताक्षरित समझौतों से राज्य में 30 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश आने की उम्मीद है।
परिणामस्वरूप राष्ट्रीय जीडीपी में महाराष्ट्र का योगदान 13 प्रतिशत तक पहुंच गया है और राज्य एक बार फिर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है।
राज्यपाल ने 'हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे समृद्धि महामार्ग' को वधवन तक बढ़ाने की भी घोषणा की, जिससे यातायात में महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है।
नक्सल प्रभावित जिले गढ़चिरौली को 'इस्पात केंद्र' के रूप में बदला जा रहा है, जबकि क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए विदर्भ में एक 'इस्पात गलियारा' की योजना बनायी गयी है। ग्रामीण संपर्क को मजबूत करने के लिए, सरकार 'मुख्यमंत्री बलिराजा कृषि सड़क योजना' को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य ने आधुनिक तकनीक के उपयोग की योजना बनायी है। राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने कृषि उत्पादकता और फसल योजना में सुधार के लिए 'कृत्रिम बुद्धिमता' (एआई) का व्यापक उपयोग करने की नीति तैयार की है।
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों के साथ मजबूती से खड़ी है और मराठी भाषी नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विवाद को कानूनी माध्यमों से हल किया जायेगा। सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पुलिसकर्मियों की आवास समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष आवास योजना शुरू की गयी है।
राज्यपाल ने वर्ष 2026-30 की अवधि के लिए राज्य की नई औद्योगिक और सेवा नीति की घोषणा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नीति सेवा और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर पैदा करेगी। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर शोक प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें सदन में ऐसा प्रस्ताव लाना पड़ेगा। श्री फडणवीस ने उन्हें एक दृढ़ इच्छाशक्ति वाला नेता बताया, जो सुबह छह बजे से काम शुरू करने और अनुशासन के लिए जाने जाते थे।
मुख्यमंत्री ने साझा किया कि उन दोनों का जन्म एक ही तारीख 22 जुलाई को हुआ था और वे उन्हें बड़े भाई की तरह मानते थे। 2014 के बाद उनका रिश्ता राजनीति से ऊपर उठकर बहुत गहरा और भावनात्मक हो गया था।
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