मुंबई , जून 20 -- कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की हत्या के लगभग दो दशक बाद आए एक महत्वपूर्ण फैसले में शहर की एक विशेष सीबीआई अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व सांसद पद्मसिंह पाटिल सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए पर्याप्त साक्ष्यों की कमी का हवाला दिया। जब फैसला सुनाया गया, तब पाटिल, उनके परिवार के सदस्य और दिवंगत पवनराजे निंबालकर का परिवार, जिसमें उनके बेटे ओमराजे निंबालकर शामिल थे, अदालत कक्ष में मौजूद थे। इस हमले में मारे गए श्री निंबालकर के ड्राइवर समद काजी के परिवार के सदस्य भी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहे।

अदालत ने इससे पहले 16 जून को अंतिम सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और सभी आरोपियों को 19 जून को उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। इसके बाद, अदालत द्वारा मामले की समीक्षा के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के बाद यह फैसला सुनाया गया। श्री निंबालकर की 3 जून, 2006 को नवी मुंबई के कलंबोली के पास मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के करीब गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सशस्त्र हमलावरों ने कथित तौर पर उनकी कार का पीछा किया और गोलीबारी की। इस हमले में श्री निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की मौत हो गई थी। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि हमलावरों को 30 लाख रुपये की सुपारी दी गयी थी।

सीबीआई के अनुसार, धाराशिव जिले में श्री निंबालकर के चचेरे भाई और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पद्मसिंह पाटिल ने कथित तौर उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची थी। जांच एजेंसी का आरोप था कि हत्या का षडयंत्र तेरणा चीनी कारखाने और स्थानीय चुनावों से जुड़े विवादों सहित तीव्र राजनीतिक व सहकारी-क्षेत्र की प्रतिद्वंद्विता के कारण रचा गया था। एजेंसी ने दावा किया कि हत्या की यह साजिश 2004 के विधानसभा चुनावों के बाद रची गयी थी।

श्री निंबालकर के परिजनों की मांग के बाद मामले को सीआईडी और बाद में सीबीआई को सौप दिया गया था। इससे पहले शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच की थी। सीबीआई ने 2009 में पाटिल को गिरफ्तार किया और आरोप पत्र दाखिल किया। 2011 में शुरू हुए इस लंबे ट्रायल के दौरान अदालत ने 128 गवाहों के बयान दर्ज किए। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी 2019 में इस मामले में गवाही दी थी।

विशेष सीबीआई अदालत के इस फैसले के साथ ही महाराष्ट्र के सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्याकांडों में से एक मामला 20 साल बाद बंद हो गया है।

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