बहराइच , मई 24 -- त्तर प्रदेश के जनपद बहराइच में वीरता, शौर्य और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव के विजय उत्सव कार्यक्रम का शनिवार देर शाम चित्तौरा झील तट स्थित स्मारक परिसर में भव्य और रंगारंग शुभारम्भ हुआ। दो दिवसीय विजयोत्सव कार्यक्रम में ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। पूरे परिसर को आकर्षक रोशनी और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था, जहां बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान विभाग के मंत्री तथा जनपद प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने एमएलसी डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, पदमसेन चौधरी, विधायक सुभाष त्रिपाठी, सुरेश्वर सिंह, श्रीमती सरोज सोनकर, राम निवास वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष बृजेश पाण्डेय, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक राज किशोर, जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्वत सहित अन्य अतिथियों के साथ फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

उद्घाटन के बाद प्रभारी मंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टालों और फूड कोर्ट का निरीक्षण किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, कृषि विभाग, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, खादी ग्रामोद्योग, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, मत्स्य, हथकरघा एवं काष्ठ शिल्प सहित अनेक विभागों की प्रदर्शनियों में सरकारी योजनाओं और स्थानीय उत्पादों की झलक दिखाई दी। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति और जनहितकारी कार्यों की जानकारी भी प्राप्त की।

इसके बाद स्मारक परिसर स्थित ऑडिटोरियम में दीप प्रज्ज्वलन और महाराजा सुहेलदेव के चित्र पर माल्यार्पण के साथ सांस्कृतिक समारोह का विधिवत शुभारम्भ हुआ। अपने संबोधन में प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष कर राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा की थी, लेकिन इतिहास में उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे वास्तविक हकदार थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने महाराजा सुहेलदेव की गौरवगाथा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य किया है। उन्होंने स्मारक निर्माण और मेडिकल कॉलेज का नाम महाराजा सुहेलदेव के नाम पर रखे जाने को ऐतिहासिक निर्णय बताया।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि राष्ट्रनायकों का सम्मान किसी भी सभ्य समाज की पहचान होता है। उन्होंने कहा कि जिन वीरों ने धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उन्हें इतिहास के पन्नों में सीमित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने विजयोत्सव को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और गौरवशाली विरासत के सम्मान का जीवंत उदाहरण बताया।

समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने महाराजा सुहेलदेव की युद्ध रणनीति और अद्भुत पराक्रम का विस्तार से उल्लेख किया। वक्ताओं ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं को रोकने के लिए मथुरा से लेकर बहराइच तक ऐसी रणनीतिक बाधाएं खड़ी की गई थीं कि उनकी सेना कमजोर पड़ गई और अंततः महाराजा सुहेलदेव ने सीमित सैनिक शक्ति के बावजूद विदेशी सेना को परास्त कर इतिहास में अमर विजय प्राप्त की।

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