नैनीताल , जुलाई 29 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पुरातात्विक महत्व के द्रोण सागर लेक (झील) के आसपास कथित अतिक्रमण मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में आज काशीपुर निवासी चक्रेश कुमार जैन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिये।
सरकार की ओर से कहा गया कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया है। अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी जारी किया गया है। सरकार की ओर से रिपोर्ट पेश करने के लिए समय की मांग की गयी। इसके बाद खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह की मोहलत देते हुए अभी तक की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से वर्ष 2025 में दायर याचिका में कहा गया कि काशीपुर स्थित ऐतिहासिक द्रोण सागर लेक में अतिक्रमण के साथ अनैतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।
इस स्थान का महाभारत काल से जुड़ाव माना जाता है और मान्यता है कि पांडवों ने अपने गुरू द्रोणाचार्य के लिये इस लेक का निर्माण किया था। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि इस लेक के चारों ओर 30 ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं।
वर्ष 2018 में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इस क्षेत्र के पुरातात्विक महत्व को देखते हुए इसे एएसआई के अधीन करने पर सहमति दी थी।
वर्ष 2020 में ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी की ओर से लेक के संरक्षण के लिये उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गयी लेकिन कोई रिपोर्ट नहीं दी गयी है।
कमेटी को यहां से होने वाली आय को पृथक से खाता खोल कर राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा करने के निर्देश दिये गये थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित