प्रयागराज , सितंबर 10 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी भर्ती को लेकर आंदोलन कर रहे प्रतियोगी छात्रों के गुरुवार को प्रस्तावित महाधरने से कुछ घंटे पहले बुधवार देर रात पुलिस ने सिविल लाइंस स्थित धरना स्थल पर कार्रवाई करते हुए वहां कई दिनों से डटे अभ्यर्थियों को हटा दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस रात करीब दो बजे धरना स्थल पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाना शुरू किया। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई। पांच अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे थे, जबकि पिछले करीब 10 दिनों से धरना-प्रदर्शन चल रहा था। प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग दिशाओं में ले जाया गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए एंबुलेंस का भी इस्तेमाल किया गया। इससे पहले बुधवार को युवा मंच के बैनर तले अनशन कर रहे टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों ने कैंडल मार्च निकाला था।
आंदोलनरत अभ्यर्थियों की मांग है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक और इंटर कॉलेजों में रिक्त पदों पर पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के आधार पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाए। उनका कहना है कि 16 सितंबर 2025 को नियमावली में किए गए बदलाव से प्रदेश के करीब सात लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे।
डीएलएड अध्यक्ष रजत सिंह के मुताबिक, प्रतियोगी छात्र पिछले पांच दिनों से 60 हजार शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर अनवरत धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद गुरुवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रतियोगी छात्रों के प्रयागराज पहुंचकर महाधरना देने की योजना है।
इस बीच आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने धरना स्थल पर 'जेन-जी राइजिंग' अभियान के तहत युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने छात्रसंघ चुनावों पर रोक और छात्रों के दमन को लेकर भी सवाल उठाए। जेएनयूएसयू के सह-सचिव दानिश ने भी आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जेएनयू से लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक छात्रों के दमन का तरीका एक जैसा है।
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