नयी दिल्ली/रायपुर , नवंबर 02 -- करीब छह हजार करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी एवं प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लेकर आई है। सोमवार को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में पेश किया गया, जहां सीबीआई की दो दिन की ट्रांजिट रिमांड की मांग पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
सीबीआई ने चंद्राकर को छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित विशेष अदालत में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड मांगी है। अनुमति मिलने पर उसे सोमवार शाम तक रायपुर लाया जा सकता है। हालांकि, बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए दलील दी कि चंद्राकर का प्रत्यर्पण धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के मामले में हुआ है, न कि सीबीआई के प्रकरण में।
महादेव सट्टा ऐप से जुड़े 13 मामलों की जांच छत्तीसगढ़ सरकार ने सीबीआई को सौंपी थी। इनमें से दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी धनशोधन के पहलू की जांच कर रहा है और चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुका है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर सीबीआई को बधाई देते हुए कहा कि प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा होगा।
सीबीआई के मुताबिक, चंद्राकर वर्ष 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह कथित फर्जी पहचान दस्तावेजों के सहारे संयुक्त अरब अमीरात से ओमान पहुंच गया था। उसके कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट में नाम 'अजंता मेंडिस' दर्ज होने और जन्मतिथि अन्य दस्तावेजों से अलग होने की जानकारी भी सामने आई थी।
खुफिया सूचना और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने आठ जुलाई 2026 को उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने भारत सरकार के माध्यम से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की। ओमान सरकार, इंटरपोल और रॉयल ओमान पुलिस के सहयोग से प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने पर सीबीआई की टीम एक नवंबर को उसे मस्कट से भारत लेकर आई।
ओमान में हिरासत के दौरान चंद्राकर ने भारत की जेल में अपनी जान को खतरा बताते हुए स्वयं और परिवार की सुरक्षा की मांग की थी। उसने महादेव नेटवर्क के राजनीतिक संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों की जानकारी जांच एजेंसियों को देने की इच्छा भी जताई थी। साथ ही बिना दबाव के बयान देने के लिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों से अलग रखने का अनुरोध किया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने महादेव ऑनलाइन बुक के जरिए देशभर में अवैध सट्टेबाजी का नेटवर्क विकसित किया था। सोशल मीडिया के माध्यम से लाखों उपयोगकर्ताओं को इससे जोड़ा गया। क्रिकेट, फुटबॉल और ताश सहित विभिन्न खेलों पर सट्टेबाजी के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल पर पैनल और शाखाएं संचालित की जाती थीं।
सीबीआई की जांच में सट्टेबाजी से अर्जित रकम को विभिन्न बैंक खातों में जमा कराने और हवाला के जरिए विदेश भेजने के आरोप सामने आए हैं। नेटवर्क को संरक्षण देने के बदले सरकारी कर्मचारियों को कथित रिश्वत दिए जाने की भी जांच की जा रही है।
सीबीआई ने संबंधित मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आईपीसी की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है। वहीं, ईडी भारत और विदेश में कई संपत्तियां कुर्क कर चुकी है।
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