रायपुर , जुलाई 21 -- महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के प्रमुख आरोपी छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच में एक नया खुलासा सामने आया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसके कब्जे से ऐसा कथित फर्जी पासपोर्ट सामने आया है, जिसमें फोटो सौरभ चंद्राकर की है, जबकि नाम श्रीलंकाई क्रिकेटर अजंता मेंडिस का दर्ज है। जांच एजेंसियां आशंका जता रही हैं कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया और कानूनी कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से इस तरह की फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर ने कथित रूप से इसी फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया था। पासपोर्ट संख्या ई3387986 वाले इस दस्तावेज में उसे 11 मार्च 1998 को जन्मा दक्षिण-पूर्व एशियाई नागरिक दर्शाया गया है। दस्तावेज के मुताबिक यह पासपोर्ट 21 जून 2024 को जारी हुआ और इसकी वैधता 21 जून 2034 तक दर्शाई गई है। एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि यह फर्जी दस्तावेज किस नेटवर्क के माध्यम से तैयार कराया गया और उसका उपयोग कैसे किया गया।

जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने पहले वानूआतू की नागरिकता हासिल की थी। उस दस्तावेज में सौरभ की जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 दर्ज है, जबकि कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट में जन्मतिथि 11 मार्च 1998 अंकित है। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग पहचान और जन्मतिथि मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह प्रत्यर्पण और कानूनी कार्रवाई से बचने की सुनियोजित रणनीति थी।

उल्लेखनीय है कि सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल है। इस प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)और केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं।

हाल ही में इंटरपोल की फाइलों के नियंत्रण के लिए आयोग (सीसीएफ) ने सौरभ चंद्राकर की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। चंद्राकर का दावा था कि भारत में उसके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है और उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी। हालांकि सीसीएफ ने कहा कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, न कि राजनीतिक उत्पीड़न से, इसलिए रेड नोटिस जारी रहेगा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीसीएफ में सुनवाई के दौरान ही सौरभ चंद्राकर संयुक्त अरब अमीरात छोड़कर ओमान पहुंच गया था। अधिकारियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करना उसकी एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिससे भारत की प्रत्यर्पण प्रक्रिया प्रभावित हो। ओमान के कानून के तहत फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए तीन से पांच वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

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