बागपत , जनवरी 13 -- उत्तर प्रदेश के बागपत में बिनौली क्षेत्र के सिरसली गांव के वैदिक निकेतन में चल रहे चार दिवसीय अथर्ववेद पारायण महायज्ञ के तीसरे दिन राष्ट्र रक्षा सम्मेलन हुआ। जिसमें वैदिक विद्वानों ने राष्ट्र निर्माण व रक्षा के लिए चिंतन मंथन किया।

सम्मेलन में आये बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के पूर्व गन्ना मंत्री एवं विधायक स्वामी ओमवेश ने कहा कि माता समाज की निर्माता है। आज माताओं को अपनी संतानों को संस्कारित करना होगा। हमारी युवा पीढ़ी राष्ट्र की रीढ़ हैं। युवा पीढ़ी स्वस्थ, संस्कारित व शिक्षित होगी तभी राष्ट्र मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि आज समाज में बुराइयों व नशाखोरी के चलते तमाम विकृतियां पनप रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में महर्षि दयानंद की वैदिक विचारधारा को आत्मसात करने पर ही राष्ट्र की रक्षा संभव है। गुरुकुल वेद कुलम हरिद्वार के अधिष्ठाता आचार्य डा.सुनील आर्य ने कहा कि आर्य समाज की विचारधारा ही समाज को जागृत व राष्ट्र को उन्नत बना सकती है।

वैदिक विद्वान प्रोफेसर सुरेंद्रपाल आर्य ने कहा कि तीन मौलिक अंग कृति, प्रकृति व संस्कृति है। यदि किसी राष्ट्र के ये तीनों अंग ठीक हैं तो वह राष्ट्र हर तरह से सशक्त उन्नत होगा। साध्वी डा. प्राची दीदी, कन्या गुरुकुल शामली की आचार्य प्रगति भारती, आचार्य स्वाति व डा.हर्षिता ने भी विचार व्यक्त किए।

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