श्रीनगर , मई 13 -- जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी ) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले के पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत करने वाले बयान का स्वागत किया।

सुश्री महबूबा ने दोनों देशों के बीच जुड़ाव को जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति के लिए एक ज़रूरी हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि पीडीपी हमेशा से यह मानती रही है कि केंद्र शासित प्रदेश में हालात सुधारने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा, "इसके बिना कोई रास्ता नहीं है। आपने देखा है कि ईरान जैसा छोटा सा देश और दूसरी तरफ अमेरिका जैसी बड़ी महाशक्ति और इज़रायल इन सबने ईरान पर कितने हमले किये और अब वे बातचीत के ज़रिए इस मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। "उन्होंने कहा " इसी तरह, एक साल पहले 'ऑपरेशन सिंदूर' हुआ था। मुझे लगता है कि दोनों तरफ से यह अहसास हुआ है, खासकर आरएसएस के नेता ने जो कहा है कि हमें उनसे बात करनी चाहिए। इसलिए, मुझे लगता है कि कोई और रास्ता नहीं है। अगर हम एकजुट रहना चाहते हैं और तरक्की करना चाहते हैं, तो हमें ऐसा करना ही होगा।"उनका यह बयान श्री होसबले के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को सीमा पार आतंकवाद का कड़ाई से जवाब देना चाहिए, लेकिन साथ ही पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाज़े भी खुले रखने चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के रुख का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता तब तक हासिल नहीं की जा सकती, जब तक पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते खुले न रखे जाएं।

उन्होंने कहा, "..यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं। सुश्री महबूबा ने कहा कि श्री वाजपेयी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच की गयी पिछली शांति पहलों का जम्मू-कश्मीर पर सकारात्मक असर पड़ा था, जिससे उग्रवाद, गिरफ्तारियों और आम लोगों की मुश्किलों में कमी आई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में "दमन का माहौल" देखने को मिल रहा है और दावा किया कि लोगों को राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के नाम पर परेशान किया जा रहा है।

पीडीपी प्रमुख ने गिरफ्तारियों, कर्मचारियों की बर्खास्तगी, घरों पर बुलडोज़र चलाने और संस्थानों को बंद करने का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया कि ऐसी कार्रवाइयों से लोगों में डर पैदा हो गया है। उन्होंने कहा, "हज़ारों लोग जम्मू-कश्मीर के बाहर की जेलों में बंद हैं। हर तरफ निगरानी है, सोशल मीडिया पोस्ट पर प्राथमिकी दर्ज हो रही हैं और सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) तथा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए ) जैसे कानूनों का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है।"हाल के महीनों में भारत और पाकिस्तान के सेवानिवृत्त राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों के बीच अनौपचारिक मुलाकातों की खबरों का ज़िक्र करते हुए सुश्री महबूबा ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच फिर से शुरू होने वाली बातचीत तनाव कम करने और जम्मू-कश्मीर के लोगों को राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकती है।

जब उनसे पूछा गया कि सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आरोप लगाया है कि पीडीपी ने अपने कार्यकाल के दौरान सबसे ज़्यादा शराब के लाइसेंस जारी किए थे, तो उन्होंने कहा कि पीडीपी के कार्यकाल के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी सरकार का हिस्सा थी और शराबबंदी की नीति को लागू करने के लिए पार्टी के पास ज़रूरी संख्या बल नहीं था।

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