श्रीनगर , अप्रैल 27 -- जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के अंतर्गत दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को "गैरकानूनी संस्था" घोषित किए जाने की आलोचना करते हुए इसे वंचित समुदायों के साथ घोर अन्याय बताया।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 24 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर स्थित सिराज-उल-उलूम को आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के अंतर्गत एक गैरकानूनी संगठन घोषित किया और उसकी गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की।
यह कदम जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी और फलाह-ए-आम ट्रस्ट से कथित रूप से जुड़े 58 स्कूलों को अपने नियंत्रण में लेने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। सिराज-उल-उलूम जम्मू-कश्मीर में अवैध घोषित होने वाला पहला मदरसा है।
सुश्री महबूबा ने जम्मू-कश्मीर सरकार पर आरोप लगाया कि वह क्षेत्र की पहचान और गरिमा पर हो रहे हमलों के सामने मूक दर्शक और डरपोक की भूमिका निभा रही है।
एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि संस्था को गैरकानूनी घोषित करना समाज के गरीब एवं वंचित वर्गों के साथ घोर अन्याय है। उन्होंने बताया कि यह मदरसा लंबे समय से उन छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र रहा है जो महंगे स्कूलों का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं और इसने प्रतिष्ठित डॉक्टरों और पेशेवरों को तैयार किया है जिन्होंने राष्ट्र के विकास में योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र-विरोधी गतिविधि के किसी ठोस सबूत के बिना इन परोपकारी संस्थानों पर प्रतिबंध लगाना पूर्वाग्रह एवं दुर्भावना को दर्शाता है।
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने भी इस निर्णय की आलोचना करते हुए क्षेत्र में उत्पीड़न एवं अशक्तिकरण करने का आरोप लगाया।
एक्स पर अपने पोस्ट में, श्री मीरवाइज ने कहा कि कई एजेंसियां किसी न किसी बहाने से नागरिकों को परेशान कर रही हैं, उनकी संपत्तियों को जब्त किया जा रहा है और युवाओं पर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज कर उन्हें केंद्र शासित प्रदेश के बाहर की जेलों में बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "एक मौजूदा सांसद को अपने गंभीर रूप से बीमार पिता से मिलने के लिए जमानत देने से इनकार कर दिया गया और अब वंचितों की सेवा करने और विद्वानों, डॉक्टरों, इंजीनियरों एवं पेशेवरों को तैयार करने की समृद्ध विरासत वाले एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान को यूएपीए के अंतर्गत गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है!"श्री मीरवाइज ने सवाल किया कि ऐसी नीतियां कब तक जारी रहेंगी और उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन एवं निर्वाचित सरकार दोनों से अपना रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया।
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