पटना , फरवरी 05 -- बिहार के विधि एवं स्वास्थ्य मंत्री तथा पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रभारी मंगल पांडेय ने ममता सरकार पर कर्मचारियों के दमन एवं शोषण का आरोप लगाते हुए गुरूवार को कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और उनके कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चल रही महंगाई भत्ते (डीए) के विवाद में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है।
श्री पांडेय ने आज बयान जारी कर कहा कि कई सालों की लड़ाई अैर संघर्ष के बाद पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को आखिरकार अदालत के आदेश से उनके हक के अनुसार महंगाई भत्ता मिलने वाला है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि कर्मचारियों की एकता, धैर्य और पक्के इरादे का सबूत है। उन्होंने कहा कि इससे पहले ममता सरकार साजिश एवं दमनकारी नीतियों के तहत कर्मचारियों के हक को लगातार नजर अंदाज कर रही थी।
मंत्री श्री पांडेय ने बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल की सरकार ने महंगाई भत्ता रोकने की पुरजोर कोशिश की और जनता के पैसों का दुरुपयोग करते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए कई बड़े वकीलों की सेवा ली। साथ ही कर्मचारियों के जायज आंदोलन पर पुलिसिया कार्रवाई भी की। उन्होंने कहा कि बंगाल में लगातार दमन और अन्याय के बावजूद, राज्य के कर्मचारियों ने हार नहीं मानी और एक लंबे संघर्ष के जरिए अपना हक हासिल किया। उन्होंने कहा कि यह जीत अन्याय के खिलाफ न्याय की जीत है।
श्री पांडेय ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि महंगाई भत्ता न तो कोई रियायत है और न ही कोई खैरात, बल्कि यह कर्मचारियों का कानूनी और अटूट अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गलत साबित हुईं। अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए वह बार-बार कहती रहीं कि ''डीए'' कर्मचारियों का अधिकार नहीं है, लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ कहा है कि डीए कर्मचारियों का कानूनी तौर पर अधिकार है, कोई ग्रांट नहीं। उन्होंने कहा कि अब आने वाले विधानसभा चुनावों में ममता की पार्टी को जनता सबक सिखाएगी।
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