जालौन , जून 6 -- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए जनभागीदारी आधारित एक अभिनव मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड रामपुरा के ग्राम मल्हानपुरा में भीषण गर्मी के बीच चार जल तारा संरचनाओं का निर्माण कर वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण की प्रभावी पहल की गई है।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने शनिवार को गांव पहुंचकर जल तारा संरचनाओं का निरीक्षण किया तथा इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही जल सहेलियों के कार्यों की सराहना की। जिलाधिकारी ने कहा कि जल तारा केवल एक संरचना नहीं, बल्कि जल संकट से निपटने का एक टिकाऊ और दीर्घकालिक समाधान है। इसके माध्यम से वर्षा के जल को संरक्षित कर भूमि के भीतर पहुंचाया जाता है, जिससे भूजल स्तर में सुधार होता है और जलभराव तथा मृदा अपरदन जैसी समस्याओं में भी कमी आती है।
पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने कहा कि जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जल सहेलियों के प्रयास न केवल गांवों को जल-सुरक्षित बना रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण धरोहर सिद्ध होंगे।
परमार्थ संस्था के सहयोग से संचालित वीबीजी राम जी योजना के अंतर्गत जनपद में 1,000 जल तारा संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक लगभग 150 जल तारा तैयार किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल भंडार के पुनर्भरण का कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर जल सहेलियों ने जल तारा की कार्यप्रणाली, रखरखाव और इसके लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित सफाई, सिल्ट हटाने और जल प्रवाह की निगरानी से इन संरचनाओं को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखा जा सकता है।
निरीक्षण कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह सेंगर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एच.एन. प्रसाद, उप जिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य सहित कई अधिकारी और बड़ी संख्या में जल सहेलियां उपस्थित रहीं।
यह पहल जल संरक्षण के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर उभर रही है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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