कोलकाता , दिसंबर 18 -- सुशील मोहता की अध्यक्षता वाला मर्लिन समूह कोलकाता शहर में एक ज़मीन विवाद में फंस गया है जिसमें आरोप है कि इस समूह ने डीसी पॉल समूह के एक पूर्व निदेशक के साथ मिलकर आनंदपुर इलाके में एक कीमती जमीन पर 600 करोड़ रुपये की मर्लिन नियासा परियोजना के विकास के लिए धोखाधड़ी से संयुक्त विकास समझौता (जेडीए) किया था।
दक्षिण 24 परगना के जिला न्यायाधीश सुभ्रदीप मित्रा ने इसे प्रथम दृष्टया गड़बड़ी मानते हुए छह दिसंबर को एक आदेश पारित किया जिसमें उस पूर्व निदेशक शांति रंजन पॉल और मर्लिन प्रोजेक्ट्स तथा उनके आदमियों और प्रतिनिधियों को सात जनवरी, 2026 तक उक्त जेडीए और पॉल द्वारा मर्लिन के पक्ष में निष्पादित पावर ऑफ अटॉर्नी के अनुसार काम करने पर रोक लगा दी गयी है।
इस मामले में याचिकाकर्ता डी सी पॉल ग्रुप कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और अधिरा कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड ने आरोप लगाया है कि शांति रंजन पॉल ने जाली दस्तावेजों के आधार पर मर्लिन के साथ वह समझौता किया था। आरोप है कि मोहता की कंपनी के पक्ष में एक पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित की गयी थी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मर्लिन समूह को पता था या उन्हें पता होना चाहिए था कि पॉल के पास समझौता करने का अधिकार कभी नहीं था। याचिकर्ता ने कहा कि इससे साफ होता है कि यह जालसाजी, धोखाधड़ी और धोखे का नतीजा थे, और इस प्रकार दोनों के बीच एक स्पष्ट संबंध था।
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