नयी दिल्ली , जुलाई, 16 -- फोर्टिस अस्पताल ने दुनिया में पहली बार लैपरोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर प्रत्यारोपण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है जिसमें मरीज की दोनों बेटियों ने अपने पिता को एंड-स्टेज लिवर रोग से बचाने के लिए अपने अपने लिवर के हिस्से दान किये हैं।
इस जटिल प्रक्रिया को किर्गिस्तान के 51-वर्षीय मरीज पर आजमाया गया जो हेपेटाइटिस बी संक्रमण से प्रभावित होने के बाद लिवर की बीमारी के अंतिम चरण में पहुंच चुके थे। उनकी दोनों बेटियों की उम्र 20 और 21 वर्ष थी और सर्जरी के बाद अब पिता और दोनों बेटियां ठीक हैं।
दुनिया में यह अपनी किस्म का पहला मामला है, जिसमें दोनों डोनर्स की लिवर डोनेशन सर्जरी को मिनीमॅली इन्वेसिव लैपरोस्कोपिक तकनीकों की सहायता से अंजाम दिया गया जिसमें प्रत्येक डोनर सर्जरी करीब पांच घंटे चली जबकि रेसिपिएंट ट्रांसप्लांट सर्जरी को लगभग आठ घंटे में पूरा किया गया। मरीज के शरीर से निकाले गए लिवर की बाद में जांच से क्रोनिक हेपेटाइटिस की पुष्टि हुई जो हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस डी इंफेक्शन की वजह से हुआ था। इसमें लिवर को काफी अधिक नुकसान पहुंचा था।
मरीज को लिवर फेलियर की गंभीर स्टेज (जिसमें मरीज पीलिया से पीड़ित होता है) की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती किया गया था। वह एसाइटिस (पेट में अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ के असामान्य रूप से एकत्र होना), गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल ब्लीडिंग तथा मनौवैज्ञानिक समस्याओं से भी पीड़ित थे। मरीज की विस्तृत मेडिकल जांच से लिवर फेलियर, पोर्टल हाइपरटेंशन, गंभीर किस्म के थ्रोम्बोसाइटोपीनिया (ऐसी मेडिकल कंडीशन जिसमें खून में प्लेटलेट्स की संख्या असामान्य रूप से कम हो जाती है) तथा खून का थक्का जमने में परेशानी जैसी समस्याओं की भी पुष्टि हुई।
मरीज की मेटाबोलिक जरूरतों को देखते हुए किसी अकेले डोनर के लिवर से इलाज पूरा होना संभव नहीं था, तब प्रत्यारोपण टीम ने मरीज की दोनों बेटियों के लिवर ग्राफ्ट की मदद से डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर प्रत्यारोपण करने का फैसला किया।
फोर्टिस अस्पताल, नोएडा के डॉ विवेक विज, (चेयरमैन, लिवर ट्रांसप्लांट एंड हेपाटोबिलियरी साइंसेज़) ने कहा, "डुअल लोब लिविंग डोनर प्रत्यारोपण सर्जरी दुनिया में कुछ गिने-चुने केंद्रों पर ही की जाती है। दोनों डोनर्स के मामले में इसे पूरी तरह से लैपरोस्कोपिक तरीके से करना लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांटेशन की भी प्रमुख उपलब्धि है। इस उपलब्धि ने उन मरीजों के लिए भी उम्मीद दिखायी है जिन्हें बड़े लिवर ग्राफ्ट वॉल्यूम की आवश्यकता है ।
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