मुंबई , सितंबर 08 -- महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राज्य की महायुति सरकार ने कहा है कि उसने मराठा आरक्षण के संबंध में अपने प्रमुख वादों को पूरा कर दिया है और इस अब इस मामले में आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे को अपने मुंबई मार्च तथा आंदोलन को वापस लेने पर विचार करना चाहिए।
कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के रुख और फैसलों का जोरदार बचाव किया। श्री पाटिल ने कहा कि सरकार ने पात्र मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए हैं। इसके लिए लगभग 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड की पहचान की गई है और उन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराया गया है ताकि आवेदकों को आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने में आसानी हो सके।
इससे पहले राज्य सरकार और श्री जरांगे के बीच गतिरोध उस समय गहरा गया जब श्री जरांगे ने अपनी मांगों के समर्थन में मुंबई के लिए मार्च का प्रस्ताव किया। श्री पाटिल ने सरकार की प्रमाण पत्र के लिए कुनबी रिकार्ड संबंधी पहल पर आवेदकों की सीमित प्रतिक्रिया पर चिंता जताते हुए कहा कि आवेदकों की मदद के लिए विशेष शिविर होने के बावजूद अब तक केवल कुछ सौ औपचारिक आवेदन ही जमा हुए हैं।
श्री विखे ने प्रशासन पर वादों को पूरा न करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठा आरक्षण और अन्य कल्याणकारी उपायों पर कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित और भड़काऊ टिप्पणियों पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि इस तरह के व्यक्तिगत हमलों से महाराष्ट्र के सामाजिक सौहार्द पर गलत असर पड़ सकता है।
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