मुंबई , जुलाई 31 -- मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के 29 अगस्त से नये आंदोलन की घोषणा के बीच महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि सरकार समाज की मांगों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठा रही है और इससे किसी नये आंदोलन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

श्री जरांगे ने हाल ही में सरकार पर मराठा समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया था और घोषणा की थी कि अगर लंबित मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह अपना आंदोलन फिर से शुरू करेंगे। उनकी इस घोषणा के बाद सरकार को मराठा आरक्षण मुद्दे से जुड़े कदमों की स्थिति की समीक्षा करनी पड़ी।

श्री पाटिल ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान राज्य सरकार की शुरू की गयी कई पहलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मराठा छात्रों की छात्रवृत्ति बहाल कर दी गयी है, आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान की गयी है और 32 मृतक आंदोलनकारियों के परिजनों को निगमों और एमआईडीसी प्रतिष्ठानों में सरकारी नौकरियां देने का फैसला किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले बंद की गयी कल्याणकारी योजनाओं को फिर से शुरू कर दिया गया है, जबकि सारथी संस्थान के माध्यम से यूपीएससी कोचिंग के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 400 कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद गजट के प्रावधानों को लागू करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गयी है, जिलाधिकारियों को हेल्पलाइन चलाने के निर्देश दिये गये हैं और सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए हर सोमवार को साप्ताहिक समीक्षा की जायेगी। जाति प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के लिए भी निर्देश जारी किये गये हैं।

महा विकास अघाड़ी (एमवीए) पर निशाना साधते हुए श्री विखे पाटिल ने आरोप लगाया कि उसके कार्यकाल के दौरान मराठा समाज को प्रभावित करने वाले कई फैसलों को बदल दिया गया था, जिससे बड़ा नुकसान हुआ। उन्होंने सत्ता में लौटने के बाद प्रमुख पहलों को पुन: शुरू करने का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दिया और आरक्षण प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए लगभग 58 लाख ऐतिहासिक रिकॉर्ड खोजने पर शिंदे समिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिंदे समिति का कार्यकाल 2027 तक बढ़ा दिया गया है और आश्वासन दिया कि कार्यान्वयन से जुड़े किसी भी मुद्दे को हल किया जायेगा।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके की टिप्पणियों का जवाब देते हुए श्री विखे पाटिल ने उनसे उन लोगों के नाम बताने को कहा जिन्होंने उन्हें धमकी दी थी। उन्होंने कांग्रेस पर सरकार के सकारात्मक रुख के बावजूद विरोध प्रदर्शनों के जरिये छात्रों के मुद्दों का राजनीतिकरण करने के प्रयास का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी दल राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

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