कोलकाता , अप्रैल 08 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को अपने चुनावी हलफनामे में उनके पास कोई अचल संपत्ति नहीं होने और लगभग 75,000 रुपये नकदी के साथ ही दो बैंक खातों में 12 लाख रुपये से कुछ ज़्यादा जमा होने की घोषणा की हैं।

सुश्री बनर्जी ने आज भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया।

सुश्री बनर्जी के चुनावी हलफनामे के अनुसार पाँच साल पहले की तुलना में उनकी कुल संपत्ति में कमी आई है। उन्होंने अपने पास 75,700 रुपये नकद और दो बैंक खातों में 12,76,209 रुपये जमा होने की घोषणा की है, जिससे उनकी कुल चल संपत्ति 15,37,509 रुपये हो गई है।

हलफनामे में मुख्यमंत्री के नाम पर कोई घर, वाहन या कोई अचल संपत्ति पंजीकृत नहीं है, और उन्होंने अपनी देनदारियाँ भी शून्य घोषित की हैं। इसकी तुलना में उनके 2021 के हलफनामे में उनके पास 69,255 रुपये नकद और बैंक जमा के रूप में 13,53,356 रुपये दिखाए गए थे, साथ ही नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट में 18,490 रुपये का निवेश भी दिखाया गया था। उस समय उनकी कुल चल संपत्ति 16,72,352 रुपये थी, जो पाँच वर्षों में 1,34,843 रुपये की गिरावट को दर्शाता है।

हालाँकि, उनके सोने के गहनों का मूल्य, जिनका वज़न 9 ग्राम और 750 मिलीग्राम है, 2021 में 43,837 रुपये से बढ़कर अब 1.45 लाख रुपये हो गया है।

2021 की घोषणा के अनुसार सुश्री बनर्जी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है; उनके खिलाफ कभी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है और न ही किसी मामले में उन पर कोई आरोप तय किया गया है।

हलफनामे से पता चलता है कि सुश्री बनर्जी 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से हार गई थीं। 2021 में नंदीग्राम में हार के बाद सुश्री बनर्जी भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापस लौटीं। यह सीट शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने खाली की थी, जिन्होंने बाद में खरदह से जीत हासिल की।

सुश्री बनर्जी एक बार फिर भवानीपुर से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि चट्टोपाध्याय को बालीगंज से मैदान में उतारा गया है।

इस मुकाबले में सुश्री बनर्जी और श्री अधिकारी के बीच एक बार फिर आमना-सामना होने की उम्मीद है। भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से उम्मीदवार बनाया है। श्री अधिकारी ने अपना नामांकन पहले ही दाखिल कर दिया था।

सुश्री बनर्जी ने अपने पेशे के तौर पर राजनीति और समाज सेवा को बताया है, और उनकी आय के स्रोतों में रॉयल्टी और बैंक से मिलने वाला ब्याज शामिल है।

हलफनामे के अनुसार उन्होंने 1970 में देशबंधु शिशु शिक्षालय से सेकेंडरी परीक्षा पास की, 1974 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के जोगमाया देवी कॉलेज से स्नातक किया, 1977 में उसी विश्वविद्यालय से एमए किया, और 1982 में जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की।

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