, April 14 -- वर्ष 1951 में प्रदर्शित फिल्म दीदार में शमशाद बेगम ने नौशाद के संगीत निर्देशन में ..चमन में रहके वीराना होता है ..जैसे सुपरहिट गीत गाये।वर्ष 1952 में प्रदर्शित बहार में सचिन देव बर्मन में जहां शमशाद ने दुनिया का मजा ले लो दुनिया तुम्हारी है जैसा फड़कता हुआ गीत गाया वही इसी फिल्म में उनका गाया गीत सइंया दिल में आना रे बेहद लोकप्रिय हुआ था।
शमशाद बेगम ने जहां मदर इंडिया में विदाई के अवसर पर पी के घर आज प्यारी दुल्हनिया चली जैसा भावविभोर करने वाला गीत गाया।आज के दौर में जो गीत धूम धड़ाके वाले कहे जाते है इन गीतो का आगाज करने का श्रेय शमशाद बेगम को जाता है।शमशाद बेगम ने राजकपूर की फिल्म आवारा में एक दो तीन आजा मौसम है रंगीन जैसा फड़कता हुआ गीत गाने मे उन्हें कोई कठिनाई नही हुयी।
शमशाद बेगम के गाये उल्लेखनीय गीतो में कुछ है..जब उसने गेसू बिखराये बादल आया झूम के,न आखो में आंसू ना होठो पे हाय, लेके पहला पहला प्यार,रेशमी सलवार कुर्ता जाली का,तेरी महफिल में किस्मत आजमा के हमभी देखेगे,कजरा मोहब्बत वाला आंखो में ऐसा डाला.,होली आई रे कन्हाई,बूझ मेरा क्या नाम रे,कही पे निगाहे कही पे निशाना,कभी आर कभी पार, आना मेरी जान संडे के संडे जैसे कई सुपरहिट नगमे शामिल है।
शमशाद बेगम ने अपने दौर के सभी दिग्गज संगीतकार नौशाद,गुलाम हैदर,ओपी नैय्यर,कल्याणजी-आनंद जी,सी रामचंद्र के साथ काम किया ।वर्ष 2009 में शमशाद बेगम को उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुय पदम भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया1शमशाद बेगम सहगल की बड़ी प्रशंसक थी और उन्होंने उनकी फिल्म देवदास 14 बार देखी थी।अपनी खनकती आवाज से श्रोताओ को मंत्रमुग्ध करने वाली शमशाद बेगम 23 अप्रैल 2013 को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।
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