, April 13 -- अभिनय में आयी एकरूपता से बचने और स्वंय को चरित्र अभिनेता के रूप मे भी स्थापित करने के लिये बलराज साहनी ने खुद को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया।इनमें हकीकत,वक्त,दो रास्ते,एक फूल दो माली,मेरे हमसफर जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल है।वर्ष 1965 मे प्रदर्शित फिल्म ..वक्त.. में बलराज साहनी के अभिनय के नये आयाम दर्शको को देखने को मिले ।इस फिल्म में उन्होंने लालाकेदार नाथ के किरदार को जीवंत कर दिया ।इस फिल्म में उनपर फिल्माया गाना ..ऐ मेरी जोहरा जबीं तुझे मालूम नही ..सिने दर्शक आज भी नही भूल पाये है। निर्देशक एम.एस.सथ्यू की वर्ष 1973 मे प्रदर्शित ..गर्म हवा..बलराज साहनी की मौत से पहले उनकी महान फिल्मो में से सबसे अधिक सफल फिल्म थी । उत्तर भारत के मुसलमानो के पाकिस्तान पलायन की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में बलराज साहनी केन्द्रीय भूमिका में रहे।इस फिल्म में उन्होंने जूता बनाने बनाने वाले एक बूढ़े मुस्लिम कारीगर की भूमिका अदा की। उस कारीगर को यह फैसला लेना था कि वह हिन्दुस्तान में रहे अथवा नवनिर्मित पकिस्तान में पलायन कर जाये। यदि दो बीघा जमीन को छोड दे तो बलराज साहनी के फिल्मी कैरियर की सबसे अधिक बेहतरीन अदाकारी वाली फिल्म गर्म हवा ही थी ।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी बलराज साहनी अभिनय के साथ-साथ लिखने में भी काफी रूचि रखते थे । 1960 में अपने पाकिस्तानी दौरे के बाद बलराज साहनी ने "मेरा पाकिस्तानी सफरनामा" और 1969 में तत्कालीन सोवियत संघ के दौरे के बाद "मेरा रूसी सफरनामा" किताब भी लिखी। 1957 मे प्रदर्शित फिल्म "लाल बत्ती" का निर्देशन भी साहनी ने किया। अपने संजीदा अभिनय से दर्शको को भावविभोर करने वाले महान कलाकार बलराज साहनी 13 अप्रैल 1973 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।

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