जालना , मार्च 06 -- मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया है कि सरकारी अधिकारी राज्य भर में कुनबी जाति के रिकॉर्ड आंकड़ों को लेकर मराठा समुदाय और राज्य सरकार दोनों को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इन आंकड़ों की समीक्षा करने और अधिकारियों की कड़ी निगरानी करने का आग्रह किया है।

श्री पाटिल ने एक बयान में उल्लेख किया है कि मराठा आरक्षण के मुद्दे को हल करने के लिए वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की अध्यक्षता में गठित उप-समिति की हालिया बैठक में यह दावा किया गया था कि 48 लाख कुनबी रिकॉर्ड पाये गये हैं और 12 लाख प्रमाणपत्र पहले ही वितरित किये जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये आंकड़े पूरी तरह से झूठे हैं और सरकार के पहले दिये गये आंकड़ों से काफी अलग हैं।

श्री पाटिल के अनुसार, शिंदे समिति की रिपोर्ट के आधार पर पहले जो आंकड़े बताये गये थे, उनमें कुनबी रिकॉर्ड की संख्या अलग थी। उन्होंने बताया कि पिछले आंकड़ों और हालिया उप-समिति की बैठक में घोषित आंकड़ों के बीच लगभग दस लाख रिकॉर्ड का अंतर है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि रिकॉर्ड आखिर कहां गये ?उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ अधिकारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन आरोप लगाया कि कुछ जिलों में कुछ अधिकारी जानबूझकर बिना उचित सत्यापन के प्रमाणपत्र जारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें मराठा समुदाय और सरकार दोनों को गुमराह कर रही हैं। मुख्यमंत्री को इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठाने चाहिये।

श्री पाटिल ने यह सवाल भी उठाया कि मुंबई आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आठ मामलों में से सात वापस ले लिये गये हैं, तो एक मामला अब तक वापस क्यों नहीं लिया गया? उन्होंने शेष मामले को वापस लेने और राज्य भर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामले रद्द करने की मांग की है।

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