मनेन्द्रगढ़ , अक्टूबर 15 -- छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही और जन्म के 24 दिन बाद नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सकीय अमले पर प्रसव के दौरान जबरदस्ती करने और नवजात की कई हड्डियां टूटने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पांच सदस्यीय जांच दल गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

स्वास्थ्य विभाग से आज प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम लालपुर के स्कूलपारा निवासी उपासना को 10 सितंबर को प्रसव के लिए मनेन्द्रगढ़ सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपासना और उनके पति शिवकुमार का आरोप है कि गर्भावस्था के दौरान पांच बार सोनोग्राफी कराई गई थी। जांच में गर्भस्थ शिशु स्वस्थ पाया गया था, लेकिन उसकी स्थिति सीधी नहीं होने के कारण चिकित्सकों ने ऑपरेशन से प्रसव कराने की सलाह दी थी।

परिजनों का कहना है कि पूर्व में ऑपरेशन की सलाह दिए जाने के बावजूद अस्पताल में सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया गया। उपासना ने आरोप लगाया कि प्रसव के दौरान उनके साथ जबरदस्ती की गई और चिकित्सकीय प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई। परिवार का दावा है कि इसी दौरान नवजात बच्ची को गंभीर चोटें आईं।

बच्ची के जन्म के बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति ठीक नहीं होने पर उसे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर भेजा गया। परिजनों के मुताबिक, वहां कराई गई जांच और एक्स-रे में बच्ची की दोनों जांघों, कूल्हे और हाथ की हड्डियों में फ्रैक्चर होने का पता चला। परिवार ने इन चोटों के लिए प्रसव के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया है।

परिजनों ने बताया कि उपचार के बावजूद बच्ची को बचाया नहीं जा सका और जन्म के 24 दिन बाद उसकी मौत हो गई। घटना से आहत परिवार ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

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