चंडीगढ़ , अगस्त 19 -- चंडीगढ़ मनीमाजरा की पुरानी संपत्तियों के नामांतरण और रिकॉर्ड दुरुस्त कराने को लेकर एक परिवार ने नगर निगम अधिकारियों पर करीब चार साल सात महीने तक फाइल लंबित रखने और बार-बार नए दस्तावेज एवं आपत्तियां लगाने के आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ता अशोक कुमार चड्ढा ने प्रधानमंत्री कार्यालय और चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, उनके पिता सत देव चड्ढा के निधन के बाद 27 अक्टूबर 2021 को कानूनी वारिसों के नाम संपत्ति रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें पुराने रोपड़ रोड की दुकान नंबर 220 से 231 और दर्शनी बाग स्थित मकान नंबर 213/1 शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि पटवारी और तहसीलदार की रिपोर्ट, फिजिकल डिमार्केशन, डीजीपीएस रिपोर्ट, साइट प्लान और अन्य दस्तावेज कई बार जमा किए गए, लेकिन नामांतरण नहीं हुआ।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024-25 में भी नए दस्तावेज मांगे जाते रहे। हाउस टैक्स को लेकर भी विवाद सामने आया। 24 अक्टूबर 2025 को करीब 4.58 लाख रुपये टैक्स जमा कराने की मांग किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने आरटीआई और कमेटी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पुराने बकाया टैक्स का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उनके अनुसार 16 मार्च 2026 की कमेटी रिपोर्ट में भी बकाया टैक्स का रिकॉर्ड नहीं मिला।

शिकायत में कुछ अधिकारियों पर डेवलपमेंट चार्ज और फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर कथित रूप से पैसे मांगने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं है।

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