मोहाली , जनवरी 24 -- पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) योजना की धनराशि रोकी, ताकि इस जनकल्याणकारी योजना को धीरे-धीरे खत्म किया जा सके।
इसका सीधा नुकसान ग्रामीण गरीब मजदूरों, दलितों, महिलाओं और आश्रित परिवारों को उठाना पड़ रहा है। पूर्व मंत्री ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत गांव कुरड़ा, मोटे माजरा, तंगोरी, कुरड़ी, शेखन माजरा, नागरी और गीगे माजरा में पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों के साथ बैठकें कर एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीबों और मजदूर वर्ग की जीवनरेखा है, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए गरीबों के अधिकारों पर डाका डाल रही है। इसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
श्री सिद्धू ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना और इसके नियमों में किये गये बदलाव मजदूर वर्ग के हितों पर सीधा हमला हैं। यह योजना कांग्रेस की ऐतिहासिक देन है, जिससे लाखों परिवारों को रोजगार मिला। गांवों का विकास हुआ और मजदूरों को शहरों की ओर पलायन से राहत मिली, लेकिन भाजपा सरकार इस सच्चाई को मिटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देश भर से मजदूर अपनी पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं, कहीं महीनों से मजदूरी अटकी हुई है, तो कहीं ऑनलाइन हाजिरी और तकनीकी नियमों के नाम पर गरीबों को काम से बाहर किया जा रहा है। अब केंद्र द्वारा योजना का नाम बदलने और इसमें बदलाव करने के कदम मनरेगा को कागज़ी योजना बनाने की साज़िश का हिस्सा हैं।
श्री सिद्धू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब कांग्रेस मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ेगी और मनरेगा योजना को पूरी तरहबहाल करवाने तक संघर्ष जारी रखेगी। कांग्रेस मांग करती है कि केंद्र सरकार तुरंत फंड जारी करे, 100 दिनों का काम सुनिश्चित करे और मजदूरी का समय पर भुगतान करे।
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