अमृतसर , जुलाई 13 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रो सरचांद सिंह ख्याला ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी की पुस्तक 'इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नोट ए मेमोइर' में किये गये खुलासों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का यह कहना, "मैं आत्महत्या कर लूंगा" उनकी उस गहरी पीड़ा को दर्शाता है, जो उन्हें अपनी ही सरकार के मंत्रियों द्वारा चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की गरिमा से खिलवाड़ किये जाने के कारण झेलनी पड़ी।
सोमवार को जारी बयान में प्रो. ख्याला ने कहा कि श्री कुरैशी की पुस्तक से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस का लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान केवल राजनीतिक सुविधा तक सीमित रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस संस्थाओं पर दबाव बनाती है और विपक्ष में रहते हुए उन्हीं संस्थाओं का सहारा लेकर राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा मुस्लिमों के लिए नौकरियों में आरक्षण को 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत करने की घोषणा आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने सबसे पहले इसका विरोध किया और चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आयोग ने सलमान खुर्शीद की निंदा की थी।
प्रो ख्याला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का राजनीतिक इतिहास धर्म, जाति और वर्ग के आधार पर समाज को बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की राजनीति से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि जून 2023 में अमेरिका दौरे के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मुस्लिम लीग को 'धर्मनिरपेक्ष पार्टी' बताये जाने वाला बयान भी इसी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का इतिहास चुनाव आयोग पर दबाव बनाने, आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन और धर्म के नाम पर वोट मांगने से जुड़ा रहा हो, उन्हें आज लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर दूसरों को सीख देने का नैतिक अधिकार नहीं है।
प्रो. ख्याला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज चुनाव आयोग के प्रशासनिक और कानूनी निर्णयों को राजनीतिक रंग देकर उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित अन्य चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर लगाये जा रहे आरोप निराधार हैं। उनका कहना था कि मतदाता सूचियों की शुद्धता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है तथा फर्जी, दोहरायी गयी या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया का विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के समान है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह का यह कथन कि 'चुनाव आयोग भारत के लोकतंत्र की आत्मा है, यदि हम इसे खो देंगे तो सब कुछ खो देंगे' आज सबसे अधिक कांग्रेस के लिए ही एक चेतावनी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले अपने इतिहास, आचरण और तुष्टीकरण की राजनीति पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री कुरैशी की पुस्तक में किया गया यह खुलासा केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि भारत के लोकतंत्र की मजबूती उसकी स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं में निहित है और उनका सम्मान करना प्रत्येक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित