भोपाल , जुलाई 20 -- मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 मंत्री गौतम टेटवाल ने सदन में पेश किया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधेयक पर मंगलवार को चर्चा कराई जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े उज्जैन भूमि क्रय प्रकरण पर विपक्ष द्वारा चर्चा की मांग को लेकर हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।

सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस विधायकों ने गांधी प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन किया। इस दौरान कई विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस ने किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध नहीं होने, न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल खरीदी और अन्य कृषि समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

जबकि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश का किसान खाद और बीज के लिए परेशान है, जबकि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। कांग्रेस विधायक सुनील उईके ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान स्वयं को किसान पुत्र बताते हैं, इसलिए उन्हें किसानों से किए गए वादे याद दिलाने के लिए यह प्रदर्शन किया जा रहा है। कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाहा ने कहा कि किसानों को समय पर बीज, खाद और फसलों का उचित मूल्य मिलना चाहिए।

वहीं भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों के कारण खाद की आपूर्ति पर कुछ असर पड़ा है, लेकिन प्रदेश में किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि यूसीसी महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति के कारण इसका विरोध कर रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कांग्रेस से सभी समाजों के हित में राजनीति करने की बात कही।

शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े उज्जैन भूमि क्रय प्रकरण पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा कराने की मांग की। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह पुराना मामला है और नियमों के तहत स्थगन प्रस्ताव के अंतर्गत चर्चा योग्य नहीं है। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। कांग्रेस विधायक आसंदी के समीप पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष ने पहले आधे घंटे और बाद में दोपहर तीन बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

कार्यवाही पुनः शुरू होने पर विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी पूरक कार्यसूची के माध्यम से सरकार ने यूसीसी सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखे। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन और अन्य सदस्यों ने आपत्ति जताई कि इतने महत्वपूर्ण विधेयकों को मूल कार्यसूची में शामिल किए बिना अचानक पेश किया गया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया जा चुका था और विधेयकों पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा होगी।

सरकार ने सदन में मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026, मध्यप्रदेश निरसन विधेयक-2026, मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक-2026, मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक-2026, मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026, मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026, मध्यप्रदेश कोड ऑन एम्पावरिंग वर्क स्पेसेज-2026, मध्यप्रदेश श्रम शक्ति संहिता-2026, मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता संशोधन विधेयक सहित अन्य विधेयक प्रस्तुत किए।

सत्र के दौरान श्रद्धांजलि सूची में कुछ घटनाओं के पीड़ितों के नाम शामिल नहीं होने, डीजे-साउंड सिस्टम पर कार्रवाई, खेल विभाग, पंढरपुर स्थित मध्यप्रदेश भवन, केन-बेतवा परियोजना, जौरा शक्कर कारखाना तथा अन्य जनहित के मुद्दों पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा हुई।

इधर, विधानसभा के बाहर ओबीसी महासभा ने 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा 13 प्रतिशत पदों पर लगी रोक हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और मांगें पूरी नहीं होने पर विधानसभा घेराव की चेतावनी दी।

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