बैतूल , अक्टूबर 13 -- मध्यप्रदेश में शत्रु संपत्तियों की पहचान और उनके विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैतूल, भोपाल, जबलपुर, सिवनी, सतना, कटनी, सीहोर, रतलाम और डिंडोरी के कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश दिए।

प्रशासन का उद्देश्य इन संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाकर उनके कानूनी रिकॉर्ड दुरुस्त करना है। इसके लिए पुराने राजस्व अभिलेखों, खसरों और वर्ष 1974 के उच्च न्यायालय के फैसलों का मिलान किया जा रहा है, ताकि संपत्तियों के स्वामित्व और वैध वारिसों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

शत्रु संपत्ति उन संपत्तियों को कहा जाता है, जो भारत छोड़कर पाकिस्तान या चीन जैसे देशों में जा बसे व्यक्तियों से संबंधित हैं और कानून के तहत भारत सरकार के नियंत्रण में आती हैं। इन संपत्तियों का प्रबंधन शत्रु संपत्ति अभिरक्षक विभाग करता है।

निर्देशों के बाद बैतूल जिला प्रशासन ने भूमि अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिले में कुछ संपत्तियां वैध वारिसों के नाम दर्ज हैं या वर्ष 1974 से पहले बेची जा चुकी हैं। भोपाल की नवाबी संपत्तियों को भी इस प्रक्रिया में संवेदनशील माना जा रहा है। तैयार किए जा रहे विस्तृत विवरण के माध्यम से संपत्तियों की भौतिक और कानूनी स्थिति का आकलन किया जाएगा तथा लंबित मामलों की जानकारी जुटाई जाएगी।

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