भोपाल , नवम्बर 16 -- कभी 'बीमारू राज्य' की श्रेणी में गिना जाने वाला मध्यप्रदेश आज कृषि समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक बनकर देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बनी नीतियों और किसानों की कड़ी मेहनत ने प्रदेश को खाद्यान्न उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना दिया है, जिसके चलते मध्यप्रदेश अब देश का नया 'फूड-बास्केट' कहलाने लगा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का श्रेय प्रदेश के परिश्रमी किसानों को जाता है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, बिजली आपूर्ति में सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, भावांतर भुगतान योजना और कृषि यंत्रीकरण ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की विकास दर अब डबल डिजिट में पहुँच गई है, जिसमें कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रदेश आज गेहूं, चना, मसूर, सोयाबीन और तिलहन उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर है। कई फसलों में मध्यप्रदेश ने पंजाब और हरियाणा जैसे परंपरागत कृषि सम्पन्न राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में भी प्रदेश ने नए आयाम स्थापित किए हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट, फूड प्रोसेसिंग इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज चेन जैसी पहलें किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि "हर खेत तक पानी, हर किसान तक प्रगति और हर घर तक समृद्धि" राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है। उन्होंने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अमले को बधाई देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश वैश्विक कृषि मानचित्र पर भी अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।
बीते वर्षों में सीमित सिंचाई सुविधाओं और कमजोर अवसंरचना वाले मध्यप्रदेश ने सरकार की योजनाबद्ध नीतियों से उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। हालिया आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य की विकास दर 24 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है।
प्रदेश के किसानों ने ड्रिप इरिगेशन, ऑर्गेनिक खेती, मल्टीक्रॉपिंग और फसल विविधीकरण जैसे आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। कृषि विश्वविद्यालयों और केवीके द्वारा किसानों को नई तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
कृषि में अभूतपूर्व वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। युवा खेती को नए अवसर के रूप में देख रहे हैं। ई-नाम और डिजिटलीकृत मंडियों के कारण किसानों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच प्राप्त हुई है। फूड प्रोसेसिंग इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज के विस्तार से कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन और निर्यात की संभावनाएँ बढ़ी हैं।
सोलर पंपों पर अनुदान सहित कई योजनाएँ किसानों को ऊर्जा और संसाधन उपलब्ध करा रही हैं। किसानों के परिश्रम और सरकार की संवेदनशील नीतियों ने मध्यप्रदेश को कृषि शक्ति के रूप में नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया है।
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