भोपाल , मार्च 3 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के कृषि, खाद्य उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को प्राप्त 27 जीआई टैग प्रदेश की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए किसानों, उद्यमियों, शिल्पकारों और संबंधित विभागों को बधाई दी।

प्रदेश के जिन प्रमुख उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, उनमें चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी एवं फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर खिलौने, दतिया-टीकमगढ़ का बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, पन्ना का हीरा, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर-विदिशा का शरबती गेहूं, नागपुरी संतरा, झाबुआ का कड़कनाथ, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड का कठिया गेहूं तथा जावरा का लहसुन शामिल हैं।

हाल के वर्षों में बैतूल की भरेवा कला, खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और पेपर मैश शिल्प को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ है। वर्ष 2024 और 2025 में कई नए उत्पाद इस सूची में जुड़े हैं, जिससे प्रदेश की पारंपरिक कला और कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिली है।

जीआई टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान और प्रामाणिकता का प्रमाण होता है। यह पंजीकरण 10 वर्ष के लिए मान्य होता है और इसके नवीनीकरण का प्रावधान भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के प्रयासों से प्रदेश के अन्य उत्पादों को भी शीघ्र जीआई टैग दिलाने की दिशा में कार्य जारी है, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान और अवसर प्राप्त होंगे।

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