पटना , जनवरी 15 -- बिहार सरकार के कृषि विभाग की ओर से संचालित मधुमक्खी पालन एवं मधु उत्पादन योजना से राज्य में एक नई 'मीठी क्रांति' देखने को मिल रही है और प्रदेश शहद उत्पादन में देश का चौथा बड़ा उत्पादक बन गया है।

विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राज्य में 22,587.25 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन दर्ज किया गया है और इस पहल के चलते बिहार अब देश में शहद उत्पादन में चौथे पायदान पर पहुंच गया है।

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार मधुमक्खियों ने न केवल शहद उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि परागण प्रक्रिया के माध्यम से अन्य फसलों की उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। इससे किसानों की आय में इजाफा हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

हाल ही में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुये कहा है कि राज्य सरकार जल्द ही शहद की समग्र अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिये नई नीति लाने जा रही है। इस नीति के तहत मधु उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत किया जायेगा, जिससे बिहार के शहद को देश और विदेश के बाजारों में बेहतर पहचान और उचित मूल्य मिल सके।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004-05 से पहले बिहार में शहद उत्पादन बेहद सीमित था। बाद में राष्ट्रीय बागवानी मिशन और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत परागण को बढ़ावा देने के लिये हर साल 20 हजार से एक लाख तक मधुमक्खी बक्सों का छत्ता सहित अनुदानित वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

कृषि विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र बिहार की ग्रामीण समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा।

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