मधुबनी , मई 14 -- बिहार में मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने सरकारी कार्यों में लगातार लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले 118 पंचायत सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।
जिलाधिकारी श्री शर्मा ने स्पष्ट कहा कि पंचायत सचिव ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ हैं।उन्होंने कहा कि सरकार की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाएं पंचायत स्तर पर इन्हीं के माध्यम से संचालित होती हैं। जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करना,सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन, मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना, पंचायत स्तरीय विकास कार्यों की निगरानी, राजस्व एवं लोक सेवाओं से संबंधित कार्यों के साथ-साथ बिहार की जनगणना-2027 जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व पंचायत सचिवों के जिम्मे होते हैं। ऐसे में कार्यस्थल से अनधिकृत अनुपस्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों एवं विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला गंभीर कृत्य है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में भी संबंधित पंचायत सचिवों को कई बार कार्यालय आदेश एवं पत्राचार के माध्यम से निर्देशित किया गया था, कि वे सात दिनों के भीतर अपने कर्तव्य स्थल पर उपस्थित होकर लंबित कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित करें। बावजूद इसके अनेक पंचायत सचिवों द्वारा सरकारी आदेशों की लगातार अवहेलना की गई तथा वे अपने कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद निदेशक, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना के निर्देशों एवं उपलब्ध प्रतिवेदनों के आलोक में यह कठोर कार्रवाई की गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध,पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की उदासीनता, लापरवाही अथवा गैर- जिम्मेदाराना रवैया किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण जवाबदेही, अनुशासन एवं संवेदनशीलता के साथ करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यसंस्कृति में जवाबदेही, पारदर्शिता एवं जनसेवा की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी एवं कर्मचारी ईमानदारी, तत्परता एवं समर्पण के साथ कार्य करेंगे, उन्हें प्रशासन द्वारा पूरा सहयोग एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं जनहित एवं विकास कार्यों को प्रभावित करने वाली लापरवाही पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना-2027 राज्य एवं राष्ट्रहित से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिये पंचायत स्तर पर सक्रिय प्रशासनिक व्यवस्था अनिवार्य है। ऐसे में किसी भी स्तर पर शिथिलता या कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाले कर्मियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाएंगे।
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