चेन्नई , सितंबर 30 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को 'जेम ग्रेनाइट्स' के मालिक और पॉक्सो मामले के आरोपी उद्योगपति आर. वीरामणि से जुड़े मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार के बनाए विशेष जांच दल को मामले में सभी साक्ष्य एकत्र करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

तमिलनाडु पुलिस से जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग वाली वाराही नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि तमिलनाडु पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी या 'क्रिस्टल बॉल' नहीं है जिससे सारे सबूत एक बार में मिल जाएं। न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या उन्हें राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं है? उन्होंने कहा कि एसआईटी का गठन चार दिन पहले ही हुआ है और जांच शुरू हो चुकी है। बिना समय दिए जांच सीबीआई को सौंपना कतई उचित नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि पॉक्सो अदालत के क्लोजर रिपोर्ट खारिज किए जाने और अक्टूबर 2025 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर दोबारा जांच के आदेश के बाद वीरामणि और अन्य के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए थे। पुलिस अब तक आरोपी उद्योगपति, उसकी परिचित शांति, उसके पति महेंद्र सिमकन और पूर्व कर्मचारी गणेशन सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस ने आरोपी के पास से आपत्तिजनक वीडियो भी बरामद किए हैं।

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