चेन्नई , जुलाई 21 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर दो सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिये नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
न्यायालय ने श्री विजय के पेरम्बूर निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया। उल्लेखनीय है कि श्री विजय चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचि पूर्व दोनों सीटों से चुनाव जीते थे। हालांकि, उन्होंने पेरम्बूर सीट अपने पास रखने का निर्णय लिया और तिरुचि पूर्व सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उस सीट को रिक्त अधिसूचित कर दिया गया था।
श्री विजय पेरम्बूर सीट से 53,715 मतों के अंतर से विजयी हुए थे। उन्हें 1 लाख, 20 हजार, 365 मत मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के आर.टी. शेखर को 66,650 मत प्राप्त हुए थे।
चुनाव परिणाम को आर.टी. शेखर के साथ-साथ मतदाता दिनेश और लक्ष्मी नरसिम्हन ने उच्च न्यायालय में अलग-अलग चुनाव याचिकाएं दायर कर चुनौती दी है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि श्री विजय ने अपने नामांकन पत्र में, विशेष रूप से अपनी परिसंपत्तियों और लंबित मामलों के संबंध में, असंगत और अधूरी जानकारी दी थी। याचिकाकर्ताओं ने इन आधारों पर उनके चुनाव को अमान्य घोषित करने की मांग की है।
जब यह मामला न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन के समक्ष सुनवाई के लिए आया, तो याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायालय को बताया कि विजय और मामले में प्रतिवादी बनाए गए चुनाव अधिकारियों को नोटिस सफलतापूर्वक तामील नहीं हो पाया था।
इस दलील पर संज्ञान लेते हुए, न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायण ने मुख्यमंत्री और चुनाव अधिकारी सहित अन्य प्रतिवादियों को नया नोटिस जारी करने का निर्देश दिया तथा मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले सात जुलाई को न्यायालय ने श्री विजय और विलीवक्कम सीट से जीत हासिल करने वाले मंत्री आधव अर्जुना को उनकी जीत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था।
श्री शेखर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों का इस्तेमाल किया गया, जो चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने फॉर्म 26 में भी गड़बड़ियों की बात कही है। उनके अनुसार, तिरुचि पूर्व और पेरम्बूर के हलफनामों पर एक ही दिन दो अलग-अलग नोटरी के सत्यापन हैं, जिससे संदेह पैदा होता है कि उम्मीदवार एक ही दिन दोनों नोटरी के सामने कैसे उपस्थित हुए।
याचिका में यह भी आरोप है कि फॉर्म 26 में आयकर से जुड़ी जानकारी पूरी तरह नहीं दी गयी, सोशल मीडिया प्रचार (जिसमें 'रूट पीआर एजेंसी' का इस्तेमाल भी शामिल है) का खर्च नहीं दिखाया गया और तय सीमा से ज्यादा चुनावी खर्च किया गया। इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(6) के तहत भ्रष्ट आचरण बताया गया है।
इसके अलावा, चर्च और मंदिर के अंदर चुनाव प्रचार करने का आरोप भी लगाया गया है, जिसे धारा 123(3) के तहत भ्रष्ट आचरण माना जाता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार सी1, सी2 और सी7 फॉर्म सही तरीके से प्रकाशित नहीं किये गये।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित