चेन्नई , सितंबर 24 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को मदुरंतकम (सु) और धारापुरम (सु) सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव पर रोक लगाने की मांग संबंधी जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी। चेन्नई के एक अधिवक्ता ने यह याचिका दाखिल की थीमुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि उपचुनाव का खर्च वसूलने के लिए 'चुनाव खर्च सुरक्षा' लागू करने और उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने वालों के लिए 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' शुरू करने जैसी राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि इस बारे में कानून बनाना विधायिका का काम है।इस याचिका में इस्तीफा देने वाले उम्मीदवारों के उसी सीट से किसी दूसरी पार्टी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने पर पांच साल की रोक लगाने की भी मांग की गई थी।

पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, "राहत नहीं दी जा सकती। कानून बनाना विधायिका का काम है। हम कानून नहीं बना सकते।"यह जनहित याचिका सैदापेट के अधिवक्ता के. सुथन ने तब दायर की थी जब अप्रैल के चुनावों में चुने गए अन्नाद्रमुक के छह विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और बाद में सत्ताधारी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) में शामिल हो गए। इन छह विधायकों में मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम), पी. सत्यभामा (धारापुरम), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई), डॉ. एसक्की सुब्बैया (अंबासमुद्रम), सी. विजय भास्कर (विरालिमलई) और एम.आर. विजयभास्कर (करूर) शामिल थे।

चुनाव आयोग ने मदुरंतकम और धारापुरम की दो सीटों के लिए उपचुनाव का ऐलान किया था, जबकि मुख्यमंत्री विजय की सीट त्रिची ईस्ट समेत सात सीटों को खाली घोषित किया गया था। टीवीके ने इस्तीफ़ा देने वाले उम्मीदवारों को उन्हीं सीटों से टिकट देकर इनाम दिया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि छह सदस्यों ने अपने विधायक पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और सत्ताधारी टीवीके पार्टी में शामिल हो गए हैं, जिससे उपचुनाव की ज़रूरत पड़ गई है। लेकिन चुनाव आयोग ने सिर्फ़ दो सीटों ( मदुरंतकम और धारापुरम) के लिए उपचुनाव की घोषणा की है और चुनाव से जुड़ी याचिकाओं के लंबित होने का हवाला देते हुए बाकी पाँच सीटों के लिए कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है। चुनाव आयोग ने अदालत को यह भी बताया था कि जब तक चुनाव से जुड़ी लंबित याचिकाओं का पूरी तरह से निपटारा नहीं हो जाता, तब तक वह पाँच सीटों पर उपचुनाव नहीं कराएगा।

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