चेन्नई , अक्टूबर 13 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के उस फ़ैसले को सही ठहराया जिसमें उन्होंने अन्नाद्रमुक के छह बागी विधायकों का इस्तीफ़ा मंज़ूर किया था। इन विधायकों ने पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री विजय की सत्ताधारी पार्टी टीवीके का दामन थाम लिया था।

तमिलनाडु में विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक के लिए यह फ़ैसला एक और झटका माना जा सकता है क्योंकि पार्टी पहले से ही कई नेताओं के पार्टी छोड़ने की समस्या से जूझ रही है।

अन्नाद्रमुक व्हिप एस.एस. कृष्णमूर्ति और 'देशिया मक्कल काची' के नेता एम.एल. रवि की याचिका पर आदेश देते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने अध्यक्ष को यह भी निर्देश दिया कि वह चार बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की कार्यवाही पर दो महीने के भीतर फ़ैसला लें। याचिका में अन्नाद्रमुक विधायकों के इस्तीफ़े को अध्यक्ष द्वारा स्वीकार करने के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी।

अन्नाद्रमुक के व्हिप ने अपनी याचिका में अध्यक्ष के उस फ़ैसले पर सवाल उठाया था जिसमें उनके इस्तीफ़े को तब मंज़ूरी दी गई जब उनके ख़िलाफ़ अयोग्यता की कार्यवाही चल रही थी। न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एक सितंबर को इस मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। बेंच को नौ अक्टूबर को फ़ैसला सुनाना था लेकिन इसे आज के लिए टाल दिया गया था।

चुनाव के परिणाम घोषित होने के कुछ ही समय बाद, 25 बागी नेताओं ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया और विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय द्वारा लाए गए विश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद, अन्नाद्रमुक ने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि वे दलबदल विरोधी कानून के तहत उन सभी को अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया शुरू करें।

बाद में, चुने गए 25 विधायकों में से चार, के. मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम), पी. सत्यभामा (धरापुरम), एसक्की सुब्बैया (अंबासमुद्रम) और एस. जयकुमार (पेरुंदुरई) ने दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी भी कार्रवाई से बचने के लिए अपने पदों और अन्नाद्रमुक से इस्तीफा दे दिया और टीवीके में शामिल हो गए। जबकि 21 विधायकों ने अपने कार्यों पर अफ़सोस व्यक्त कर माफ़ी मांगी और अन्नाद्रमुक ने उन्हें माफ़ कर दिया। इसके बाद, अन्नाद्रमुक ने अध्यक्ष से अपील की कि उनके ख़िलाफ़ अयोग्यता की कार्यवाही रोक दी जाए और उन चार विधायकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू की जाए।

अयोग्यता की कार्रवाई से बचने के बाद, करूर और विरलिमलाई के दो और विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया और टीवीके में शामिल हो गए; अध्यक्ष ने उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इन सीटों को खाली घोषित कर दिया गया और विधानसभा सचिवालय ने उपचुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को इसकी सूचना दी। छह सदस्यों के इस्तीफे के बाद, सदन में अन्नाद्रमुक की संख्या 47 से घटकर 41 रह गई।

अन्नाद्रमुक ने चार विधायकों के इस्तीफ़े को मंज़ूरी देने के अध्यक्ष के फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी और उसमें दो अन्य विधायकों को भी शामिल किया था। आज अपने आदेश में न्यायालय ने अध्यक्ष के फ़ैसले को सही ठहराया, साथ ही उन्हें चार अन्य विधायकों के अयोग्य ठहराने की लंबित कार्यवाही पर फ़ैसला लेने का निर्देश दिया।

छह अक्टूबर को मदुरंतकम और धारापुरम की दो सीटों पर उपचुनाव हुए और इस्तीफ़ा देने वाले सदस्य टीवीके के टिकट पर फिर से चुने गए, लेकिन न्यायालय ने चुनाव से जुड़ी याचिकाओं के लंबित होने का हवाला देते हुए चुनाव आयोग को पांच सीटों त्रिची पूर्व (जहां से मुख्यमंत्री विजय ने इस्तीफ़ा दिया था), करूर, अंबासमुद्रम, विरालिमलाई और पेरनदुरई पर उपचुनाव कराने से रोक दिया है, जबकि मदुरंतकम और धारापुरम समेत कुल सात सीटें खाली हुई थीं।

चुनाव आयोग ने भी न्यायालय को बताया कि जब तक चुनाव याचिकाओं का निपटारा नहीं हो जाता तब तक वह पांच सीटों पर उपचुनाव के लिए अधिसूचना जारी नहीं करेगा। बहस पूरी होने के बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

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