मथुरा , फरवरी 27 -- मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर रंग-भरी एकादशी के अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बरसाना और नंदगांव की लठामार होली के बाद आज जन्मभूमि परिसर में राधा-कृष्ण संग अलौकिक होली का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पूरा जन्मस्थान परिसर अबीर, गुलाल और फूलों की खुशबू से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य के साथ होली खेलकर स्वयं को धन्य महसूस किया। ब्रज में होली का उत्सव बसंत पंचमी से आरंभ होकर लगभग 40 दिनों तक चलता है। मान्यता है कि द्वापर युग में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने होली की परंपरा का आरंभ किया था।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि रंग-भरी एकादशी के दिन ठाकुर जी भक्तों के साथ होली खेलते हैं। उन्होंने कहा कि यह सदियों पुरानी परंपरा है और आज के दिन समूचा परिसर प्रेम और भक्ति के रंग में डूब जाता है। इस अवसर पर काशी से भेजे गए अबीर-गुलाल से भी होली खेली गई।

जन्मस्थान स्थित लीला मंच पर राधा-कृष्ण के स्वरूपों द्वारा रासलीला का मनोहारी मंचन किया गया। मथुरा के हुरियारों और हुरियारिनों ने पारंपरिक लोकगीतों पर उत्साहपूर्वक नृत्य प्रस्तुत किए। ब्रज का प्रसिद्ध 'मयूर नृत्य' और 'चरकुला नृत्य' विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

कार्यक्रम के दौरान मंच से फूलों की वर्षा की गई, जिससे पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। हुरियारिनों ने प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाकर लठामार होली की परंपरा का भी प्रतीकात्मक निर्वहन किया। रंगों और भक्ति के इस अद्भुत संगम ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि जन्मस्थान पर खेली गई यह होली उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है, जिसे वे सदैव अपने हृदय में संजोकर रखेंगे।

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