मथुरा , अगस्त 29 -- भगवान श्रीकृष्ण की पावन प्राकट्य भूमि मथुरा में चार सितंबर (शुक्रवार) को भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव शास्त्रीय मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुसार भव्य और दिव्य रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य रूप से 'गौ रक्षा-राष्ट्र रक्षा' का संकल्प लिया जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार भगवान श्रीकृष्ण 'कलहंस' पुष्प-बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। समुद्र मंथन से प्राप्त रत्नों की भावना पर आधारित कलात्मक 'पंचरत्नी' पोशाक और रत्न-जड़ित मुकुट ठाकुरजी धारण करेंगे।
जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में तीन सितंबर को शाम 5:30 बजे भव्य पोशाक अर्पण एवं शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या और श्रीकाशी विश्वनाथ धाम वाराणसी से आए विशेष उपहार, प्रसाद, वस्त्र और पवित्र द्रव्य शामिल होंगे।
कंस के प्राचीन कारागार के स्वरूप वाले श्रीगर्भ-गृह को करीब 200 किलोग्राम चांदी और आकर्षक पुष्पों से सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां होने वाले कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण बड़ी एलईडी स्क्रीन और टेलीविजन चैनलों पर किया जाएगा।
जन्मोत्सव में मंगल ध्वनि और आनंद संकीर्तन के लिए उज्जैन से डमरू और मृदंग के वादकों को आमंत्रित किया गया है। एक से पांच सितंबर तक प्रतिदिन शाम सात बजे से रात 11 बजे तक पवित्र लीलामंच पर विभिन्न कृष्ण-लीलाओं का मंचन किया जाएगा।
जन्मोत्सव के दिन श्रद्धालुओं का प्रवेश गोविंद द्वार (गेट संख्या 0-3) से और निकास मुख्य द्वार (गेट संख्या 0-1) से होगा। सुरक्षा कारणों से मोबाइल फोन, कैमरा, बैग, इलेक्ट्रॉनिक सामान तथा जूते-चप्पल मंदिर परिसर में ले जाना प्रतिबंधित रहेगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रूपम सिनेमा, श्री गोविन्दम और राधापार्क में नि:शुल्क सामान घर एवं जूता घर संचालित किए जाएंगे। परिसर में पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और खोया-पाया केंद्र की व्यवस्था रहेगी। निकास द्वार पर विशेष महाप्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की जाएगी।
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