मथुरा , फरवरी 23 -- केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अपने एक दिवसीय दौरे पर धर्मनगरी मथुरा पहुँचे, जहाँ उन्होंने विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
अपनी सादगी और विद्वत्ता के लिए पहचाने जाने वाले राज्यपाल ने मीडिया से बातचीत में भारतीय संस्कृति, ब्रज की महिमा और मानवता के मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने मथुरा के प्रति विशेष लगाव व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "ब्रज की इस पावन धरती पर जब भी आता हूँ, एक असीम शांति का अनुभव होता है। मैं स्वयं को राजनीतिज्ञ से अधिक भारतीय संस्कृति का एक छात्र मानता हूँ।"उन्होंने कहा कि ब्रज और मथुरा केवल भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के महान आदर्शों और मूल्यों के उद्गम स्थल हैं। यहीं से निकले जीवन-मूल्यों ने पूरे देश को दिशा दी और विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ी।
भारतीय संस्कृति की व्याख्या करते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि इसका मूल तत्व 'मानव की दिव्यता' है। उनके अनुसार ईश्वर की सच्ची आराधना कर्मकांडों तक सीमित नहीं, बल्कि हर जीवित प्राणी में परम तत्व को देखने में है। यही वास्तविक अध्यात्म है।
राज्यपाल ने समाज में एकता और भाईचारे पर बल देते हुए कहा, "मेरे लिए कोई पराया नहीं है। चाहे वह संबंधी हो, मित्र हो, कोई अनजान व्यक्ति हो या विरोधी ही क्यों न हो-भारतीय संस्कृति हमें सबको समान भाव से देखना सिखाती है। जब हम मान लेते हैं कि ईश्वर हर व्यक्ति के भीतर वास करता है, तो भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाता है।"उन्होंने कहा कि प्रभु की सच्ची अर्चना यही है कि हम हर इंसान में उसी का रूप देखें। कार्यक्रम के दौरान उनकी उपस्थिति से श्रद्धालु और स्थानीय लोग प्रभावित नजर आए। उनके संदेश को वर्तमान समय में सामाजिक सौहार्द और एकता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
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