कोलकाता , मार्च 10 -- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान पाई गई 'तार्किक विसंगतियां' केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं हैं।
श्री कुमार ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में जिन 12 राज्यों में यह अभियान चलाया जा रहा है, उन सभी में ऐसी विसंगतियां सामने आयी हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि एसआईआर के दौरान विसंगतियों की पहचान करना एक मानक प्रक्रिया है। वर्ष 2002 में किये गये पिछले एसआईआर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय सत्यापन के दौरान लगभग 4 से 5 प्रतिशत मतदाताओं की उचित मैपिंग नहीं हो सकी थी और उन्हें 'अनमैप्ड' श्रेणी में रखा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रक्रिया में भी लगभग 7 से 8 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग गलत या संदिग्ध तरीके से पाई गई है, जिसे आयोग ने 'तार्किक विसंगति' के रूप में वर्गीकृत किया है।
श्री कुमार ने जोर देकर कहा कि यह कोई नयी या केवल बंगाल के लिए विशिष्ट समस्या नहीं है, बल्कि सत्यापन प्रक्रिया का एक हिस्सा है। बंगाल के मामले में हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग को माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात करने जैसे कुछ कड़े कदम उठाने पड़े।
आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 58 लाख ऐसी प्रविष्टियों की पहचान की गई जो या तो मृत हैं, डुप्लीकेट हैं या स्थानांतरित हो चुके मतदाता हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि विवादास्पद प्रविष्टियों की जांच अब उच्चतम न्यायालय की देखरेख में न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एसआईआर की पूरी कवायद संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप और पूरी तरह निष्पक्ष है, जिसे राज्य सरकार के ही बूथ स्तर के अधिकारियों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है।
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